झाड़ू लगाने वाले हाथों में सिरिंज! शराब की भट्ठी के बगल में चल रही शल्य प्रक्रिया, बिना ग्लव्स टांके लगाने का दृश्य; वीडियो में चार अन्य मरीजों के इंतजार का दावा, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल
चन्दौली एक्सप्रेस: चकिया । नीम-हकीम खतरा-ए-जान! यह कहावत चकिया के सैदुपुर बाजार में सामने आए कथित हाइड्रोसील ऑपरेशन के वीडियो के बाद चर्चा में है। आरोप है कि यहां खुले आसमान के नीचे एक मरीज को चौकी पर लिटाकर हाइड्रोसील का ऑपरेशन किया जा रहा था। न व्यवस्थित ऑपरेशन थिएटर नजर आता है, न शल्य प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम स्पष्ट दिखाई देते हैं। उपलब्ध तस्वीरों में घाव पर टांके लगाने की प्रक्रिया के दौरान संबंधित लोगों के हाथों में मेडिकल ग्लव्स नजर नहीं आते। वहीं, वीडियो में एक व्यक्ति सिरिंज में इंजेक्शन भरता दिखाई देता है।
हैरान करने वाली बात यह है कि वीडियो में कथित डॉक्टर चार अन्य मरीजों के लाइन में लगकर इंतजार करने की बात कहते सुनाई देते हैं। यानी सवाल सिर्फ एक मरीज का नहीं, बल्कि उन अन्य मरीजों की सुरक्षा का भी है, जो कथित तौर पर इलाज के इंतजार में थे।
सफाईकर्मी बने कंपाउंडर, सिरिंज किसके हाथ में?
स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि इंजेक्शन भरता दिखाई दे रहा व्यक्ति विकासखंड शहाबगंज में तैनात सफाईकर्मी है। मौके पर मौजूद अन्य लोगों को लेकर भी ऐसे ही दावे किए जा रहे हैं। अब सवाल उठना स्वाभाविक है कि सफाईकर्मियों की भूमिका इस कथित चिकित्सा प्रक्रिया में क्या थी और क्या संबंधित व्यक्ति को इंजेक्शन लगाने का आवश्यक प्रशिक्षण प्राप्त था?
सफाई की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी के हाथ में सिरिंज और चौकी पर मरीज का ऑपरेशन—आखिर यह कैसा इंतजाम है? मरीजों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बिना ग्लव्स टांके लगाने का दृश्य, संक्रमण का कितना खतरा?
हाइड्रोसील का ऑपरेशन एक शल्य प्रक्रिया है। इसमें संक्रमण नियंत्रण, स्टरलाइज किए गए उपकरण, उचित चिकित्सकीय वातावरण और ऑपरेशन के बाद देखभाल बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि घाव को दूषित हाथों या उपकरणों से छुआ जाए, तो संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।
उपलब्ध तस्वीरों में टांके लगाने की प्रक्रिया के दौरान मेडिकल ग्लव्स नजर नहीं आते। कथित ऑपरेशन शराब की भट्ठी के बगल में खुले स्थान पर किए जाने का दावा भी किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि मरीज की सुरक्षा के लिए कौन-से इंतजाम किए गए थे?
चार मरीज और इंतजार में! क्या इसी तरह होगा उनका भी ऑपरेशन?
वीडियो में कथित डॉक्टर चार अन्य मरीजों के इंतजार करने की बात कहते सुनाई देते हैं। यह कथन मामले को और गंभीर बनाता है। क्या वहां अन्य मरीजों की भी इसी तरह शल्य प्रक्रिया की जानी थी? क्या संबंधित व्यक्ति के पास ऐसी प्रक्रियाएं करने की आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और सुविधाएं थीं?
इन सवालों का जवाब स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही सामने आ सकेगा। यदि बिना आवश्यक योग्यता के ऑपरेशन करने या चिकित्सा मानकों का उल्लंघन करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग कब तोड़ेगा चुप्पी?
सैदुपुर बाजार में सामने आए इस कथित ऑपरेशन ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंदौली को संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता, ऑपरेशन की परिस्थितियों और मरीज की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करानी चाहिए।
वहीं, विकासखंड शहाबगंज प्रशासन को भी सफाईकर्मियों की कथित भूमिका की पड़ताल करनी चाहिए। यदि किसी सरकारी कर्मचारी की अनुचित संलिप्तता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
सीएमओ का फोन नहीं हुआ रिसीव
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चंदौली से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब चौकी पर खुले आसमान के नीचे कथित ऑपरेशन और चार अन्य मरीजों के इंतजार की बात सामने आ रही है, तो स्वास्थ्य विभाग कब संज्ञान लेगा? मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए कार्रवाई कब होगी?




