‘साले, काम हुआ कि नहीं हुआ?’—कथित बातचीत का दावा, भुगतान का साक्ष्य देने के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
‘विधायक-सांसद किसी का फोन आए, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता’—कथित ऑडियो से बढ़ी हलचल
शहाबगंज। विकासखंड शहाबगंज में ब्लॉक मिशन प्रबंधक (बीएमएम) पूर्णेंदु शंकर मिश्रा के साथ कथित अभद्रता और उसके बाद जारी तत्काल संबद्धता आदेश ने जिला मिशन प्रबंधन इकाई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएमएम ने जिला स्तर की अधिकारी डीसी श्वेता सिंह पर फोन पर कथित अभद्र भाषा का प्रयोग करने और काम को लेकर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। खास बात यह है कि कथित बातचीत के बाद उसी दिन उन्हें शहाबगंज से जिला मुख्यालय स्थित डीएमएमयू से संबद्ध करने का आदेश जारी हो गया।
मामले में चर्चा इसलिए भी तेज है कि डीसी श्वेता सिंह करीब चार वर्षों से चंदौली में तैनात बताई जा रही हैं और वर्तमान में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) पद का भी कार्यभार देख रही हैं। ऐसे में एक अधीनस्थ कर्मचारी की शिकायत और उसके तत्काल संबद्ध किए जाने के मामले में प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पहले फोन पर कथित अभद्रता, फिर मुख्यालय पहुंचने का निर्देश
बीएमएम पूर्णेंदु शंकर मिश्रा के अनुसार 16 सितंबर को दोपहर करीब 12 से 12:30 बजे डीसी श्वेता सिंह ने उन्हें फोन किया। बातचीत में मसुई गांव के एक समूह के खाते में धनराशि भेजे जाने को लेकर जवाब मांगा गया। मिश्रा का आरोप है कि बातचीत की शुरुआत ही कथित अभद्र भाषा से हुई।
उनके अनुसार मसोई गांव का क्लस्टर उन्हें हाल ही में अतिरिक्त प्रभार के रूप में मिला था। पूर्व बीएमएम के समय से लंबित भुगतान प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए उन्होंने समूह की महिलाओं को सक्रिय किया और ग्राम संगठन के माध्यम से धनराशि स्थानांतरित कराने की कार्रवाई शुरू कराई।
मिश्रा का दावा है कि भुगतान होने के बाद बैंक बाउचर और अगले दिन खाते का स्टेटमेंट भी अधिकारियों को उपलब्ध करा दिया गया था।
इसके बावजूद उनसे भुगतान का साक्ष्य लेकर जिला मुख्यालय पहुंचने को कहा गया। उनका आरोप है कि बाद में फोन कर दोपहर दो बजे तक मुख्यालय नहीं पहुंचने पर भी जवाब मांगा गया।
16 सितंबर को ही जारी हो गया संबद्धता आदेश

प्रकरण में सबसे अधिक सवाल समय को लेकर उठ रहे हैं। बीएमएम के अनुसार दिन में अधिकारी से बातचीत और मुख्यालय पहुंचने के निर्देश के बाद 16 सितंबर को ही कार्यालय आदेश संख्या 281/स्वरोज/एनआरएलएम/2026-27 जारी कर उन्हें तत्काल प्रभाव से शहाबगंज से जिला मुख्यालय स्थित डीएमएमयू से संबद्ध कर दिया गया।
आदेश में उन्हें तत्काल मुख्यालय पहुंचकर योगदान आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। संबद्धता अवधि में अतिरिक्त भत्ता देय नहीं होने की बात भी कही गई है।
लेकिन आदेश में संबद्धता का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया है। यही बिंदु अब पूरे मामले का अहम सवाल बन गया है।
यदि भुगतान में गड़बड़ी थी तो जांच कहां है?
यदि भुगतान प्रक्रिया में कोई वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता थी तो क्या उसकी जांच की गई? क्या संबंधित अभिलेखों और बैंक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया? क्या बीएमएम को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया?
और यदि भुगतान का बाउचर तथा बैंक स्टेटमेंट अधिकारियों को उपलब्ध करा दिया गया था तो उसके बाद तत्काल संबद्धता का आधार क्या था?
‘विधायक-सांसद किसी का फोन आए, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता’
बीएमएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कही गई बातों का एक कथित ऑडियो उपलब्ध होने का दावा किया है। उनके अनुसार इसमें कथित तौर पर कहा गया कि ‘विधायक-सांसद किसी का फोन आए, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।’
हालांकि ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इसकी प्रामाणिकता, आवाज और बातचीत के संदर्भ की तकनीकी जांच आवश्यक है।
यदि जांच में रिकॉर्डिंग वास्तविक पाई जाती है तो उसमें कही गई बातों के संदर्भ और प्रशासनिक निर्णयों पर उसके किसी संभावित प्रभाव की भी जांच की जानी चाहिए।
विधायक से सहायता मांगने के बाद बढ़ा विवाद?
मिश्रा का कहना है कि उनके बड़े पिताजी करीब एक वर्ष से पैरालाइज हैं और बिस्तर पर हैं। उनकी देखभाल की पारिवारिक जिम्मेदारी के चलते उन्होंने क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य से सहायता का अनुरोध किया था।
उनका आरोप है कि विधायक से बातचीत के बाद जिला स्तर से उन्हें तत्काल योगदान देने के निर्देश मिलने लगे।
‘कर्मचारी भी इंसान हैं, मशीन नहीं’
बीएमएम ने कहा कि काम का दबाव अपनी जगह है, लेकिन कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार भी जरूरी है। उनका कहना है कि पारिवारिक परिस्थितियों को भी प्रशासनिक स्तर पर ध्यान में रखा जाना चाहिए।
24 घंटे में क्या हुआ?
16 सितंबर, दोपहर: बीएमएम के अनुसार डीसी का फोन आया और भुगतान को लेकर जवाब मांगा गया।
दोपहर बाद: भुगतान का साक्ष्य लेकर जिला मुख्यालय पहुंचने का निर्देश मिलने का दावा।
शाम: मुख्यालय नहीं पहुंचने को लेकर दोबारा जवाब मांगे जाने का आरोप।
16 सितंबर: कार्यालय आदेश संख्या 281/स्वरोज/एनआरएलएम/2026-27 के तहत बीएमएम को तत्काल प्रभाव से डीएमएमयू चंदौली से संबद्ध किया गया।
इसके बाद: कथित ऑडियो सामने आने और निष्पक्ष जांच की मांग से मामला गरमाया।
मामला आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर अब प्रशासनिक पारदर्शिता का विषय बन गया है। इसलिए बैंक अभिलेख, भुगतान संबंधी दस्तावेज, कार्यालय आदेश, संबंधित अधिकारियों के बयान और कथित ऑडियो पर क्या कार्यवाही होती है ?




