भरी बरसात में बंधी, नाला-बाहों की खुदाई और चकरोड पर मिट्टी कार्य—एनएमएमएस पर दर्ज हो रही मजदूरों की हाजिरी
सवालों के घेरे में सरकारी कार्य: क्या चकिया की बंधियां सूख गईं, नाले-बाहों से पानी गायब हो गया और खेतों से धान की फसल?
चन्दौली एक्सप्रेस चकिया।
चकिया विकासखंड में सरकारी विकास कार्यों का एक ऐसा नजारा सामने आया है, जिसे देखकर सवाल उठना लाजिमी है। एक ओर सितंबर में लगातार बारिश का दौर जारी है, खेतों में धान की फसल खड़ी है और गांवों के नाले-बाहों में पानी मौजूद है, वहीं दूसरी ओर सरकारी रिकॉर्ड में बंधी खुदाई, डौला मरम्मत, नाला खुदाई-सफाई, बाहा सफाई और चकरोड पर मिट्टी कार्य दर्ज हैं। इतना ही नहीं, 20 सितंबर के ऑनलाइन रिकॉर्ड में संबंधित कार्यों पर मजदूरों की उपस्थिति भी दर्ज दिखाई दे रही है।
ग्राम पंचायत मुजफ्फरपुर में राजा प्रजापति के घर के पास बंधी खुदाई व डौला मरम्मत का कार्य दर्ज है। इसका वर्क कोड 3171006031/LD/958486255824935277 है और मस्टररोल संख्या 3126, 3127 व 3128 पर 30 मजदूर दिखाई दे रहे है।
इसी तरह रामपुर कला में भरतिपुर सैफन से इस्माइलपुर बॉर्डर तक बाहा सफाई का कार्य दर्ज है। यहां वर्क कोड 3171006057/IC/958486255823691670 के तहत मस्टररोल 3350 से 3355 तक 51 मजदूर दर्ज हैं।
मैनपुर में चुन्नी बाबा से मनई बॉर्डर तक नाला खुदाई व सफाई का कार्य दर्ज है। वर्क कोड 3171006056/IC/958486255823750497 के तहत मस्टररोल 3259 से 3265 तक ऑनलाइन 62 मजदूर दिखाई दे रहे हैं।
वहीं सोता में जनार्दन पाठक के खेत से उमाकांत के खेत तक चकरोड पर मिट्टी कार्य दर्ज है। इसका वर्क कोड 3171006/RC/YD/958486255824262216 है और मस्टररोल 3224 से 3228 पर 44 मजदूर दर्ज हैं।
अब सवाल पानी से है या कागज से?
सवाल यह नहीं कि पोर्टल पर क्या दर्ज है, सवाल यह है कि मौके पर वास्तव में कितना काम हुआ?
क्या इस समय चकिया की सभी बंधियां सूख गई हैं?
क्या नाले और बाहों में पानी से खाली हो गए हैं?
क्या बारिश ने नालों और बाहों को छोड़कर कहीं और जाने का रास्ता पकड़ लिया है?
क्या खेतों से धान की फसल गायब हो गई है?
अगर ऐसा नहीं है तो फिर पानी से भरे नाले और बाहों की खुदाई-सफाई कैसे हो रही है? बंधी में जलभराव के बीच खुदाई और डौला मरम्मत किस तरह संभव है? और खेतों में धान की फसल खड़ी होने के दौरान चकरोड पर मिट्टी का कार्य किस स्थिति में कराया जा रहा है?
क्या विकसित हो गई पानी के अंदर काम करने वाले मजदूरों की तकनीक?
व्यंग्य में कहें तो शायद चकिया विकासखंड ने विकास की दुनिया में कोई नई तकनीक विकसित कर ली है—पानी के अंदर काम करने वाले विशेष मजदूर।
हो सकता है वीबी जी राम जी के मजदूर अब फावड़ा लेकर पानी में उतरते हों और वहीं से नाला-बाहों की खुदाई और सफाई कर देते हों। वरना सवाल तो बनता ही है कि पानी के अंदर आखिर यह खुदाई हो कैसे रही है?
कहीं ऐसा तो नहीं कि कागजों में फावड़ा चल रहा है और जमीन पर पानी ही पानी है?
एक बार एसी कमरे से निकलकर मौके तक जाइए साहब!
बीडीओ साहब, मस्टररोल जारी करना और ऑनलाइन हाजिरी दर्ज होना अपनी जगह है, लेकिन एक बार एसी कमरे से निकलकर मौके तक भी जाइए साहब। सरकारी वाहन से उतरकर जरा यह भी देख लीजिए कि जिस जगह पोर्टल पर मजदूरों की हाजिरी लग रही है, वहां वास्तव में फावड़ा चल रहा है या पानी बह रहा है। जरा बंधी पर जाकर देखिए कि खुदाई के लिए जमीन बची है या पानी ही पानी है। नाले और बाहों में जाकर देखिए कि सफाई हो रही है या पानी अपनी रफ्तार से बह रहा है। और चकरोड पर पहुंचकर यह भी देखिए कि धान के खेतों के बीच मिट्टी कार्य की वास्तविक स्थिति क्या है।
क्योंकि कागज पर विकास दिखाना आसान है, लेकिन जमीन पर विकास दिखाने के लिए मौके तक पहुंचना पड़ता है।
अब सवाल यह है कि संबंधित अधिकारी इन कार्यस्थलों का भौतिक निरीक्षण कर एनएमएमएस पर दर्ज मजदूरों की उपस्थिति और वास्तविक कार्य की स्थिति का मिलान कब कराएंगे? यही जांच बताएगी कि बरसात के बीच दर्ज ये कार्य जमीन पर कितने वास्तविक हैं और कितने सिर्फ कागजों की दुनिया में।




