शहाबगंज में भाकियू टिकैत का संकल्प दिवस आयोजित, वृक्षारोपण और बिरहा कार्यक्रम के साथ किसानों ने उठाई आवाज
शहाबगंज, चंदौली। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के संस्थापक एवं किसान नेता महेन्द्र सिंह टिकैत की 15वीं पुण्यतिथि शुक्रवार को शहाबगंज ब्लॉक क्षेत्र में संकल्प दिवस के रूप में मनाई गई। हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जिले भर से पहुंचे सैकड़ों किसानों और संगठन पदाधिकारियों ने “जल, जंगल और जमीन बचाओ” का संकल्प लिया। इस दौरान वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया तथा राहगीरों को शरबत वितरित किया गया। कार्यक्रम में प्रादेशिक बिरहा गायन का आयोजन भी आकर्षण का केंद्र रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत किसान मसीहा महेन्द्र सिंह टिकैत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद उपस्थित किसानों ने प्रकृति संरक्षण और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि महेन्द्र सिंह टिकैत ने जीवनभर किसानों, मजदूरों, शोषितों और वंचितों की लड़ाई लड़ी और उनके बताए रास्ते पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने एडीओ पंचायत शहाबगंज अरविन्द सिंह को एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में बाजार क्षेत्र की जाम नालियों की सफाई और शहाबगंज फीडर में लगे जर्जर बिजली तारों को बदलवाने की मांग की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन बचाने का काम सरकारों को करना चाहिए, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण आम नागरिकों और किसानों को यह जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि धानापुर क्षेत्र में गंगा किनारे बसे कई गांवों की हजारों एकड़ भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है और लोग बेघर हो रहे हैं, लेकिन सरकार गंभीर नहीं दिख रही है।
उन्होंने कहा कि गंगा का बदलता चैनल लगातार खतरा पैदा कर रहा है। हाल के दिनों में इसी वजह से गंगा में एक युवक की डूबकर मौत हो चुकी है। जंगलों की कटाई और आदिवासियों के विस्थापन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर नौगढ़ क्षेत्र के जंगलों को काटा जा रहा है और किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित की जा रही है। किसानों को उचित मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा है और वे कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान ने कहा कि बाबा महेन्द्र सिंह टिकैत की आवाज इतनी प्रभावशाली थी कि उनके गुड़गुड़े की गूंज से दिल्ली की सत्ता तक हरकत में आ जाती थी। उन्होंने कहा कि टिकैत ने किसानों, मजदूरों और पीड़ितों की लड़ाई लड़ते हुए कई आंदोलन किए और जेल जाने से कभी नहीं डरे। उन्होंने याद दिलाया कि जिले की भूपेंली पंप कैनाल बाबा के संघर्ष की देन है। कंदवा आंदोलन में तीन किसानों की शहादत और शिवपुर जेल में किसानों के साथ आंदोलन को भी उन्होंने याद किया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की जमीन औने-पौने दामों में पूंजीपतियों को सौंप रही है, जिससे पर्यावरण और जनजीवन दोनों खतरे में पड़ रहे हैं। किसानों ने संकल्प लिया कि अंतिम सांस तक जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई जारी रखेंगे।
कार्यक्रम में जिलाउपाध्यक्ष छोटे लाल मोछू, नगर अध्यक्ष डॉ. राजीव मौर्य, तहसील अध्यक्ष रूपेंद्र सिंह, कन्हैया मौर्य, अलाउद्दीन, श्रवण मौर्य, सुरेन्द्र यादव, जीऊत पाल, विनोद चौहान, पंकज, फूलचंद, कृष्णा, लल्लन पाल, संजय विश्वकर्मा, शंभू चौहान, कन्हैया चौहान, अनिल पत्तू सहित बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभा की अध्यक्षता शशिकांत मौर्य तथा संचालन सतीश सिंह चौहान ने किया।




