खखड़ा, बगही और कुशहा में पुलिया-रास्ते से लेकर सीसी रोड, नाली, हैंडपंप और सार्वजनिक सुविधाओं तक विकास पर जोर; खिलची रजडीहा में भी कई कार्यों को मिली गति
चंदौली एक्सप्रेस | चंदौली।
क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसमस्याओं को लेकर सक्रिय रहने वाले छत्रबली सिंह को स्थानीय लोग विकास पुरुष के नाम से संबोधित करते हैं। क्षेत्र ही नहीं, जनपद के अलग-अलग हिस्सों से लोग सड़क, रास्ता, पुलिया, नाली, जलनिकासी, पेयजल, हैंडपंप, सार्वजनिक स्थल, मंदिर परिसर, टीन शेड और विश्राम स्थल से जुड़ी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचते हैं। खास बात यह है कि समस्या सुनने के बाद उसे केवल आश्वासन तक सीमित रखने के बजाय मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को समझने और समाधान की दिशा में पहल करने पर जोर दिया जाता है।
खखड़ा, बगही और कुशहा में रास्ते-पुलिया की जरूरत को प्राथमिकता
ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी जरूरतों में सुगम आवागमन और बेहतर संपर्क मार्ग शामिल हैं। खखड़ा, बगही और कुशहा क्षेत्र में रास्तों और पुलिया से जुड़ी जरूरतों को भी विकास की इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। गांवों के बीच संपर्क मार्ग बेहतर होने और जरूरी स्थानों पर पुलिया की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों के आवागमन के साथ किसानों, विद्यार्थियों और आम लोगों को भी सुविधा मिलती है।
विकास की इसी सोच में केवल मुख्य सड़क ही नहीं, बल्कि गांव के भीतर के रास्ते, खेतों तक पहुंचने वाले मार्ग और संपर्क मार्गों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां रास्ते की समस्या है, वहां उसके समाधान की दिशा में पहल को प्राथमिकता देने पर जोर है।
समस्या सुनने के बाद मौके पर पहुंचकर परखते हैं हकीकत
छत्रबली सिंह की सक्रियता को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी गांव से समस्या सामने आने पर पहले संबंधित स्थान की स्थिति समझने का प्रयास किया जाता है। ग्रामीणों से बातचीत कर यह जाना जाता है कि समस्या कितनी गंभीर है, कितने लोग प्रभावित हैं और किस प्रकार का कार्य वास्तव में उपयोगी होगा।
इसके बाद संबंधित स्तर पर विकास कार्य को आगे बढ़ाने की पहल की जाती है। इस कार्यशैली में समस्या सुनना, मौके पर पहुंचना, वास्तविक जरूरत समझना और फिर समाधान की दिशा में प्रयास करना प्रमुख माना जा रहा है।
सड़क से नाली और हैंडपंप तक, गांव की हर जरूरत विकास का हिस्सा
ग्रामीण विकास का मतलब केवल सीसी रोड बनाना नहीं है। सड़क के साथ नाली और जलनिकासी की व्यवस्था, पेयजल के लिए हैंडपंप, खेतों और बस्तियों तक पहुंचने वाले रास्ते, पुलिया तथा सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं भी गांव के समग्र विकास का हिस्सा हैं।
इसी क्रम में टीन शेड, विश्राम स्थल, मंदिर परिसर, थाना परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आवश्यक सुविधाओं को भी विकास के दायरे में शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। इससे विकास कार्य सीधे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ते हैं।
खिलची रजडीहा में सड़क, पुलिया और रिटर्निंग वाल के कार्यों को गति
इसी क्रम में खिलची रजडीहा में भी कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया। इनमें राम कुमार के घर से पकड़ी के पेड़ तक सीसी रोड निर्माण कार्य का शिलान्यास, मेन रोड से जितन सिंह के घर तक सीसी रिटर्निंग वाल कार्य का उद्घाटन, अवतार के खेत के पास पुलिया निर्माण कार्य का उद्घाटन तथा राम भरत सिंह के खेत से काली माता मंदिर तक सीसी रोड निर्माण कार्य का शिलान्यास शामिल है।
इन कार्यों का सीधा संबंध ग्रामीणों के आवागमन और स्थानीय जरूरतों से है। सड़क और पुलिया बनने से रास्ते सुगम होंगे, जबकि रिटर्निंग वाल जैसे कार्य संबंधित स्थान की जरूरत के अनुसार संरचना को मजबूती देने में उपयोगी हो सकते हैं।
खिलची रजडीहा के विकास में विजय शंकर सिंह बाबिल की भी सक्रिय भूमिका
वहीं खिलची रजडीहा के पूर्व प्रधान विजय शंकर सिंह बाबिल भी अपने गांव के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर लगातार प्रयासरत रहते हैं। ग्रामीणों की आवाज को सामने रखने और गांव की जरूरतों के लिए खड़े रहने के कारण उनकी सक्रियता भी क्षेत्र में चर्चा का विषय रहती है।
विजय शंकर सिंह बाबिल के साथ गांव के कई लोग भी विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रियता दिखाते हैं। राम भरत सिंह, रामअवध सिंह, काशीनाथ सिंह, राजेश्वर सिंह, कामेश्वर सिंह, अशोक सिंह, संजय सिंह, सुरेंद्र सिंह, राजीव शंकर सिंह, राहुल सिंह, उत्तम सिंह, मनमोह सिंह, सोनू सिंह, अमन सिंह, राजन सिंह और रमाशंकर यादव सहित ग्रामीणों की ओर से भी गांव की मूलभूत जरूरतों और विकास कार्यों को लेकर अपनी आवाज उठाने की बात सामने आती है।
विकास पुरुष की छवि सिर्फ निर्माण कार्यों से नहीं, कार्यशैली से बनी
छत्रबली सिंह के संदर्भ में क्षेत्र में चर्चा केवल इस बात की नहीं है कि कौन सा कार्य हुआ, बल्कि उनकी कार्यशैली को लेकर भी है। लोगों के मुताबिक कोई व्यक्ति समस्या लेकर पहुंचता है तो उसकी बात सुनने के साथ-साथ समस्या की वास्तविकता जानने के लिए मौके तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है।
यही वजह है कि ग्रामीण उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते हैं, जो समस्या को कागज पर दर्ज कराने के बजाय उसे धरातल पर समझने पर जोर देते हैं। गांव में सड़क की जरूरत हो या रास्ते की, पुलिया की समस्या हो या जलनिकासी की, पेयजल का संकट हो या सार्वजनिक स्थल पर सुविधा की कमी—हर समस्या को स्थानीय जरूरत के नजरिये से देखने की कोशिश की जाती है।
समग्र विकास की सोच से गांव की तस्वीर बदलने की कोशिश
गांव का विकास तभी व्यापक माना जाएगा, जब लोगों को आवागमन के लिए बेहतर रास्ता, बारिश के पानी की निकासी के लिए नाली, जरूरत के स्थान पर पुलिया, पेयजल के लिए हैंडपंप और सार्वजनिक स्थलों पर आवश्यक सुविधाएं मिलें। इसी के साथ मंदिर परिसर, थाना परिसर, टीन शेड और विश्राम स्थल जैसी सुविधाएं भी ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने में भूमिका निभाती हैं। छत्रबली सिंह की विकास संबंधी सक्रियता को इसी समग्र विकास की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका जोर ऐसे कार्यों पर बताया जा रहा है, जिनका लाभ सीधे ग्रामीणों को मिले और जिनसे गांव की रोजमर्रा की समस्याएं कम हों।
कार्यक्रम में कई लोग रहे मौजूद इस दौरान बनारसी सिंह, कुलदीप सिंह, उपेंद्र पांडेय, विकास सिंह, राजेश सिंह, उन्नूस सिंह, सोनू सिंह सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। ग्रामीणों और क्षेत्रीय लोगों ने विकास कार्यों की पहल को लेकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। खखड़ा, बगही और कुशहा में रास्ते-पुलिया की जरूरत से लेकर खिलची रजडीहा में सड़क, पुलिया और रिटर्निंग वाल तक विकास कार्यों की पहल इसी दिशा में एक कड़ी मानी जा रही है। वहीं विजय शंकर सिंह बाबिल और गांव के अन्य सक्रिय लोगों की भागीदारी से स्थानीय समस्याओं और विकास की जरूरतों को लगातार सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों की उम्मीद है कि विकास की यह गति आगे भी जारी रहे और सड़क, नाली, पेयजल, जलनिकासी, पुलिया, सार्वजनिक स्थल, मंदिर परिसर, टीन शेड, विश्राम स्थल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को एक साथ जोड़कर क्षेत्र का समग्र विकास धरातल पर दिखाई दे।




