डीपीआरओ-एसडीएम के आदेश भी बेअसर, तियरा में जलजमाव से ग्रामीण बेहाल
निकासी की मांग को लेकर पहुंचे ग्रामीणों से बोले एडीओ पंचायत अरविंद सिंह—‘मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के यहां जाइए, काम तो यहीं से होगा’
शहाबगंज चंदौली।
शहाबगंज विकास क्षेत्र के तियरा गांव में जलजमाव की समस्या को लेकर ग्रामीणों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। गांव में जलनिकासी की व्यवस्था कराने के लिए ग्रामीण लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। मामला जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) और उपजिलाधिकारी (एसडीएम) तक पहुंच चुका है और दोनों स्तरों से कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद जमीन पर समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इसी बीच जलनिकासी की समस्या को लेकर ग्रामीणों और एडीओ पंचायत अरविंद सिंह के बीच हुई बातचीत का वीडियो सामने आया है। बातचीत में एडीओ पंचायत की ओर से यह कहते सुना जा रहा है कि “मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के यहां जाइए, लेकिन काम तो यहीं से होगा।”
यह बयान अब पूरे मामले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब जलनिकासी जैसे स्थानीय स्तर के कार्य के लिए जिम्मेदार विभाग मौजूद है और उच्चाधिकारियों की ओर से भी निर्देश दिए जा चुके हैं, तो फिर उन्हें समस्या के समाधान के लिए लगातार इधर-उधर क्यों दौड़ाया जा रहा है। उनका आरोप है कि अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं।
आदेश कागजों में, समस्या जमीन पर
तियरा में जलजमाव कोई नई समस्या नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। रास्तों और आबादी के आसपास पानी जमा रहने से आवागमन प्रभावित होता है। लंबे समय तक जलभराव रहने से गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समस्या को लेकर कई बार शिकायत की। शिकायत ऊपर तक पहुंची तो डीपीआरओ और एसडीएम स्तर से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद यदि मौके पर स्थिति जस की तस है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी किसकी है?
‘काम तो यहीं से होगा’… फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
एडीओ पंचायत अरविंद सिंह का यह कथन कि “मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के यहां जाइए, लेकिन काम तो यहीं से होगा” कई सवाल खड़े करता है। यदि काम स्थानीय स्तर पर ही होना है तो फिर ग्रामीणों को समाधान के लिए किसके पास जाना चाहिए? और उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं होने की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तियरा गांव में मौके पर पहुंचकर जलनिकासी की वास्तविक स्थिति देखे और स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार करे। साथ ही डीपीआरओ और एसडीएम के स्तर से दिए गए निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की जाए।
ग्रामीणों का सीधा सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी बड़े अधिकारी या जनप्रतिनिधि के दरवाजे पर जाने का शौक नहीं है। वे सिर्फ अपने गांव की मूल समस्या का समाधान चाहते हैं। जब जिम्मेदार अधिकारी स्वयं कह रहे हैं कि काम यहीं से होगा, तो फिर काम कब होगा—यह सवाल अब ग्रामीण प्रशासन से पूछ रहे हैं।
वीडियो में दर्ज बातचीत और ग्रामीणों के आरोपों ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि डीपीआरओ और एसडीएम के निर्देशों के बाद तियारा के जलजमाव की समस्या का वास्तविक समाधान होता है या मामला फिर कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।




