भीषण गर्मी में गैस के लिए जंग:काउंटर कम, भीड़ ज्यादा: घंटों लाईन में लगने के बाद भी सिलेंडर लेने में उपभोक्ताओं की बढ़ रही मुश्किलें
चकिया चंदौली। भारत गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों को इन दिनों भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में उपभोक्ता सिलेंडर लेने के लिए जुट गए। स्थिति यह रही कि एक सिलेंडर पाने के लिए लोगों को तीन-तीन जगह लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है, जिससे आमजन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

बताया जा रहा है कि पहले एजेंसी पर पहुंचकर उपभोक्ताओं को लाइन में लगकर पर्ची कटवानी पड़ती है। इसके बाद सब्जी मंडी में दूसरी लाइन में लगकर भुगतान करना होता है, और फिर तीसरी जगह सिलेंडर डिलीवरी के लिए अलग लाइन झेलनी पड़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में घंटों का समय लग रहा है, जिससे लोग तेज धूप और उमस में बेहाल नजर आए।
सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है, जो सुबह से ही लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के बावजूद मौके पर पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है, जिससे लोगों में नाराजगी साफ देखी गई।

लाइन में लगे कई कार्डधारकों ने आरोप लगाया कि एक ओर वे घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग जुगाड़ के जरिए सिलेंडर ब्लैक में हासिल कर रहे हैं। इसको लेकर उपभोक्ताओं में रोष बढ़ता जा रहा है।
वहीं एजेंसी कर्मचारियों का कहना है कि रोजाना करीब 300 से 400 सिलेंडर का वितरण किया जा रहा है, लेकिन मांग अधिक होने के कारण भीड़ नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है।

काउंटर बढ़ाने की उठी मांग
उपभोक्ताओं ने मांग की है कि गैस वितरण के लिए काउंटरों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि भीड़ कम हो और लोगों को आसानी से समय पर सिलेंडर मिल सके।
व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था ने स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग है कि वितरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और छांव व पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि इस भीषण गर्मी में राहत मिल सके।
पुलिस की निगरानी में वितरण
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा। पुलिसकर्मी लाइन में लगे लोगों को व्यवस्थित कर बारी-बारी से गैस सिलेंडर का वितरण करवा रहे हैं, जिससे किसी तरह की अफरा-तफरी न हो और व्यवस्था बनी रहे।




