सुबह 8 बजे खुलता अस्पताल, 10 बजे पहुंचते डॉक्टर! लापरवाही पर कार्रवाई कब?
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल, शहाबगंज अस्पताल में दो घंटे तक खाली रहती हैं डॉक्टरों की कुर्सियां
शहाबगंज (चंदौली)। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन शहाबगंज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की व्यवस्था इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही है। अस्पताल का निर्धारित समय सुबह 8 बजे से है, लेकिन अधिकांश दिनों में चिकित्सकों की कुर्सियां करीब 10 बजे तक खाली रहती हैं। ऐसे में इलाज की उम्मीद लेकर दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। समय पर उपचार न मिलने से मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल खुलने के समय से ही मरीजों की भीड़ लग जाती है। बुजुर्ग, महिलाएं, गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चों को लेकर आने वाले परिजन सुबह से अस्पताल परिसर में डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहते हैं। कई मरीजों की तबीयत इंतजार के दौरान और बिगड़ जाती है, जिससे मजबूर होकर उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहाबगंज पीएचसी में डॉक्टरों के देर से पहुंचने की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से यही स्थिति बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब अस्पताल का समय सुबह 8 बजे निर्धारित है तो चिकित्सकों की उपस्थिति भी उसी समय सुनिश्चित होनी चाहिए। आखिर मरीजों को दो-दो घंटे तक इंतजार क्यों करना पड़ता है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
ग्रामीणों और मरीजों का आरोप है कि प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एल.बी. शर्मा अक्सर अपने सरकारी आवास पर नहीं रुकते, बल्कि प्रतिदिन वाराणसी चले जाते हैं और सुबह अस्पताल देर से पहुंचते हैं। उनका कहना है कि यदि यह आरोप सही हैं तो ऐसे मामलों की जांच कर जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में सुधार हो सके।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि शहाबगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहले भी कई बार अव्यवस्थाओं को लेकर सुर्खियों में रह चुका है। अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, दवाओं की कमी और अन्य व्यवस्थागत समस्याओं की शिकायतें लगातार होती रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण है कि स्वास्थ्यकर्मियों में जवाबदेही का अभाव दिखाई देता है।
ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से शहाबगंज पीएचसी का औचक निरीक्षण करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सीएमओ स्वयं अस्पताल पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें और चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित कराएं तो मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा। साथ ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से भी अस्पताल की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी कराने की मांग की है, ताकि लापरवाही पर अंकुश लगाया जा सके और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।




