मालदह पुल से महदाइच बिहार बॉर्डर मार्ग पर गिट्टियां उखड़कर टायरों से उड़ रहीं दूर तक, सड़क धंसने के साथ पिचिंग के बोल्डर भी बह रहे; निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
चन्दौली एक्सप्रेस | इलिया।
करोड़ों रुपये खर्च कर पुराने मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कराया गया, लेकिन कुछ ही समय में सड़क की हालत फिर सवालों के घेरे में आ गई। मालदह पुल से महदाइच बिहार बॉर्डर तक अन्य जिला मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य के लिए शिलापट्ट के अनुसार 560.40 लाख रुपये यानी करीब 5.60 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित है। शिलापट्ट पर कार्य पूर्ण होने की तिथि 27 मार्च 2025 दर्ज है। इसके बावजूद मौके की तस्वीरें सड़क की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
मार्ग पर जगह-जगह सड़क की ऊपरी परत से गिट्टियां निकलकर ऊपर आ गई हैं। वाहनों के लगातार आवागमन और भारी लोड वाले वाहनों के दबाव से कई हिस्सों में सड़क के पहियों वाले ट्रैक दबते नजर आ रहे हैं, जबकि गिट्टी ऊपर उभर आई है। ढीली गिट्टियां वाहनों के टायरों से उछलकर दूर तक जा रही हैं, जिससे राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है। तकनीकी तौर पर यहां रैवेलिंग यानी सड़क की सतह से एग्रीगेट का निकलना और रटिंग यानी पहियों के रास्ते में सड़क का दबना जैसी क्षति दिखाई दे रही है। वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इतनी कम अवधि में ऐसी स्थिति विभागीय गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल जरूर खड़े करती है।

मालदह पुल पर बरम जी के मन्दिर के पास सड़क किनारे बनाई गई पिचिंग पटरी की स्थिति भी चिंताजनक है। बोल्डर और बेस सामग्री से की गई जुड़ाई कई जगह कटकर बह गई है। पानी के बहाव से किनारे की सामग्री हटने के बाद जगह-जगह गड्ढेनुमा स्थिति बन गई है। यदि पिचिंग की डिजाइन, बोल्डर की गुणवत्ता, बेस की तैयारी, जुड़ाई, ढाल और जलनिकासी व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं रही तो पानी के दबाव से सड़क का किनारा और अधिक कमजोर हो सकता है। कई स्थानों पर मुख्य सड़क का किनारा भी टूटकर नीचे की ओर धंसता दिखाई दे रहा है। लगातार वाहनों के पहियों का दबाव और कमजोर शोल्डर इस समस्या को और बढ़ा सकता है।

इसी मार्ग के मालदह गांव में सीसी रोड पर सड़क के एक किनारे ईंट और बड़े पत्थर रखकर रास्ते को संकरा कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर इस तरह सड़क पर सामग्री रखे जाने से बड़े वाहनों को पास लेने में परेशानी होती है। टोटो, टेम्पो और छोटे वाहनों के लिए भी यह अवरोध दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और स्थानीय जिम्मेदारों की नजर इस ओर अब तक क्यों नहीं पड़ी, यह भी बड़ा सवाल है।
5.60 करोड़ के काम में गड़बड़झाले की जांच कहां हुई थी?
सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता और उसकी निगरानी को लेकर है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कार्य के दौरान मटेरियल टेस्टिंग, बिटुमिन कंटेंट, एग्रीगेट ग्रेडेशन, लेयर थिकनेस, कम्पैक्शन/डेंसिटी और सड़क की सतह की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई थी। क्या निर्माण के दौरान प्रत्येक परत की मोटाई और कम्पैक्शन की जांच की गई? इस्तेमाल किए गए एग्रीगेट और बिटुमिन का निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण हुआ था या नहीं? सड़क किनारे बनाई गई पिचिंग और शोल्डर की तकनीकी मजबूती की जांच किस अधिकारी अथवा तकनीकी टीम ने की थी?
अगर निर्माण के दौरान सभी गुणवत्ता परीक्षण मानकों के अनुरूप हुए थे तो फिर कार्य पूर्ण होने के कुछ ही समय बाद सड़क से गिट्टियां क्यों निकल रही हैं, पहियों के रास्ते में सड़क क्यों दब रही है और पिचिंग के बोल्डर कटकर क्यों बह रहे हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि कागजों पर गुणवत्ता की जांच पूरी हुई और जमीन पर सड़क की गुणवत्ता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया?
अब सिर्फ पैबंद नहीं, पूरी तकनीकी जांच चाहिए
चन्दौली एक्सप्रेस का सवाल सीधा है—जब पुराने मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण पर करीब 5.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं तो सड़क की इतनी जल्दी खराब होती तस्वीर का जिम्मेदार कौन है? सक्षम अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर पूरे मार्ग का स्थलीय और तकनीकी निरीक्षण कराना चाहिए।
सड़क की वास्तविक मोटाई, बिटुमिन कंटेंट, एग्रीगेट ग्रेडेशन, कम्पैक्शन/डेंसिटी, पिचिंग, शोल्डर, जलनिकासी और सतह की गुणवत्ता की जांच के लिए आवश्यक सैंपल लिए जाएं। जरूरत पड़े तो सड़क की कोर कटिंग कराकर लेयर थिकनेस और संरचनात्मक स्थिति की जांच कराई जाए। पिचिंग के बहने और सड़क किनारे धंसने के कारणों का भी तकनीकी परीक्षण हो। साथ ही मालदह गांव में सड़क पर रखे ईंट-पत्थरों को तत्काल हटाकर आवागमन सुचारु कराया जाए।
यदि जांच में निर्माण गुणवत्ता में कमी या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई हो और संबंधित कार्य को मानक के अनुरूप दुरुस्त कराया जाए।
आखिर 5.60 करोड़ रुपये जनता के पैसे से हुए चौड़ीकरण-सुदृढ़ीकरण कार्य का परिणाम सड़क पर दिखना चाहिए, फाइलों में नहीं। अब देखना यह है कि विभाग इन तस्वीरों का संज्ञान लेकर तकनीकी जांच कराता है या फिर गिट्टियां वाहनों के टायरों से उड़ती रहेंगी और सड़क धीरे-धीरे धंसती रहेगी।




