विजय गोंड के नेतृत्व में निकला भ्रमण, ऐतिहासिक विरासत पर जताया गर्व
चकिया। जनपद के चकिया क्षेत्र में आदिवासी समाज ने अपने गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए गोंडवाना राजचिन्ह पर माल्यार्पण कर सम्मान प्रकट किया। यह कार्यक्रम आदिवासी नेता एवं अधिवक्ता विजय गोंड (प्रदेश उपाध्यक्ष, समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ) के नेतृत्व में 20 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए और अपने ऐतिहासिक अस्तित्व पर गर्व जताया।
मां काली पोखरा से शुरू हुआ भ्रमण, वन विश्राम गृह में हुआ समापन

कार्यक्रम की शुरुआत चकिया स्थित मां काली पोखरा से हुई, जहां से आदिवासी समाज के लोग जुलूस के रूप में नगर भ्रमण करते हुए दिलकुशा वन विश्राम गृह परिसर पहुंचे। यहां गोंड राजाओं द्वारा स्थापित गोंडवाना का राजचिन्ह (हाथी के ऊपर शेर) पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि गोंडवाना राज्य का विस्तार विंध्य, कैमूर और बुंदेलखंड की पहाड़ियों तक फैला हुआ था। चन्दौली जनपद, जो विंध्य पर्वतीय क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और बिहार व झारखंड की सीमा से सटा हुआ है, इस ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यहां का भौगोलिक क्षेत्र जल, जंगल, जमीन और पहाड़ों से समृद्ध रहा है, जो आदिवासी संस्कृति की पहचान है।
नौगढ़ किला व धरोहर संरक्षण की मांग हुई तेज
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि चन्दौली जनपद के नौगढ़ क्षेत्र में गोंड राजाओं द्वारा स्थापित किला आज विलुप्त होने के कगार पर है। इसी तरह चकिया के दिलकुशा वन विश्राम गृह में मौजूद गोंडवाना का राजचिन्ह आज भी इस गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण है।
आदिवासी समाज ने वर्षों से इन धरोहरों के संरक्षण, सुरक्षा और जीर्णोद्धार की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे जौनपुर (शाही पुल के पास), प्रयागराज (रसूलाबाद पुल के पास) सहित कई स्थानों पर गोंडवाना के राजचिन्ह के अवशेष आज भी मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि गोंडवाना राज्य एक विस्तृत और समृद्ध साम्राज्य रहा है।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति, समाज में दिखा उत्साह और एकता
इस कार्यक्रम में राजचिन्ह खोजकर्ता संतोष गोंड की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके साथ त्रिलोकी पासवान, सी.पी. खरवार, टोनी खरवार, संतोष गोंड (प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य), रमापति गोंड, कांता गोंड, दिनेश गोंड, पन्ना गोंड (प्रधान), मिठाई गोंड (प्रधान), संजीव गोंड, लक्ष्मण गोंड सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने एक स्वर में कहा कि गोंडवाना की यह विरासत केवल इतिहास नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और गौरव का प्रतीक है। इसे संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।




