पूर्णेंदु मिश्रा को हटाने और पंकज को जिम्मेदारी देने की प्रकाशित खबर पर विभागीय आदेशों की टाइमलाइन खंगालने पर सामने आया अलग तथ्य
मानदेय रोकने और स्थानांतरण-सम्बद्धीकरण को लेकर मिशन निदेशक के पुराने निर्देश भी सवालों के घेरे में
चन्दौली एक्सप्रेस इलिया।
शहाबगंज विकासखंड में ब्लॉक मिशन प्रबंधन को लेकर शनिवार को प्रकाशित एक खबर के बाद विभागीय आदेशों की टाइमलाइन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रकाशित खबर में दावा किया गया कि विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर ब्लॉक मिशन प्रबंधक पूर्णेंदु शंकर मिश्रा को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया और उनकी जगह बरहनी में तैनात ब्लॉक मिशन प्रबंधक पंकज जायसवाल को शहाबगंज की जिम्मेदारी सौंप दी गई। खबर में कार्रवाई के संबंध में उपायुक्त स्वतः रोजगार श्वेता सिंह के हवाले से भी जानकारी दी गई है।
हालांकि, उपलब्ध विभागीय अभिलेख इस घटनाक्रम की टाइमलाइन को अलग तस्वीर में पेश करते हैं। उपायुक्त स्वतः रोजगार, चंदौली के कार्यालय आदेश संख्या-189, दिनांक 18 जुलाई 2026 में करीब दस कार्मिकों की तैनाती/सम्बद्धीकरण का आदेश जारी किया गया था। इसी सूची में श्री पंकज कुमार जायसवाल, बीएमएम (MFFI) का वर्तमान तैनाती स्थल बरहनी तथा नवीन तैनाती/सम्बद्धीकरण स्थल शहाबगंज दर्ज है।
आदेश में केवल तैनाती का उल्लेख ही नहीं बल्कि स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संबंधित कार्मिक पूर्व से आवंटित सीएलएफ के साथ तत्काल नवीन तैनाती/सम्बद्धीकरण स्थल पर योगदान कर अतिरिक्त आवंटित सीएलएफ का भी कार्यभार ग्रहण करते हुए अधोहस्ताक्षरी को सूचित करना सुनिश्चित करें। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने की बात भी दर्ज है।
करीब दो महीने से शहाबगंज में तैनाती, फिर अब नई जिम्मेदारी?
यानी उपलब्ध आदेश के मुताबिक पंकज जायसवाल को 18 जुलाई को ही शहाबगंज के लिए सम्बद्ध किया जा चुका था और वह करीब दो महीने से शहाबगंज में तैनात बताए जा रहे हैं। ऐसे में प्रकाशित खबर में उन्हें बरहनी में तैनात बताकर अब पूर्णेंदु मिश्रा की जगह शहाबगंज की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात प्रशासनिक घटनाक्रम को लेकर सवाल खड़े करती है।
यदि हालिया कार्रवाई के बाद पंकज जायसवाल को कोई नई अथवा अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है तो उसका अलग आदेश, पत्रांक और प्रभावी तिथि भी स्पष्ट की जानी चाहिए। वहीं यदि 18 जुलाई का आदेश ही उनकी शहाबगंज तैनाती का आधार है तो फिर हालिया खबर में इसे नई तैनाती के रूप में प्रस्तुत किए जाने का आधार क्या है—यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
मानदेय रोकने पर भी मिशन निदेशक का पुराना आदेश
मामले में उपलब्ध उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक के वर्ष 2022 के आदेश भी महत्वपूर्ण हैं। उस आदेश में मिशन के अंतर्गत कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों के स्थानांतरण/सम्बद्धीकरण को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि ऐसे कर्मियों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा और इस संबंध में किसी प्रकार की प्रक्रिया मिशन मुख्यालय को न भेजी जाए। इसी क्रम में एक अन्य आदेश में मानदेय बाधित किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि सामान्य स्थिति में मानदेय बाधित न किया जाए और विशेष परिस्थितियों में मानदेय रोकना आवश्यक हो तो इसके लिए जिलाधिकारी की अनुमति प्राप्त किए जाने की बात कही गई है।
पूर्व में मानदेय बाधित किया गया हो तो उसके कारण तथा वर्तमान में अवमुक्त किए जाने के औचित्य को स्पष्ट करने का भी निर्देश दिया गया है। हालांकि ये निर्देश वर्ष 2022 के हैं, इसलिए इनकी वर्तमान स्थिति और 2026 के आदेशों पर लागू होने की स्थिति विभागीय स्तर पर स्पष्ट की जानी चाहिए। लेकिन शहाबगंज प्रकरण में तैनाती, सम्बद्धीकरण और मानदेय से संबंधित कार्रवाई की प्रक्रिया को समझने के लिए ये अभिलेख महत्वपूर्ण हैं।
लापरवाही का आरोप तो आदेश में क्या दर्ज है?
पूर्णेंदु शंकर मिश्रा को हटाए जाने के संबंध में प्रकाशित खबर में विभागीय लापरवाही, मिशन की योजनाओं की धीमी प्रगति और स्वयं सहायता समूहों के गठन में रुचि नहीं लेने जैसे कारण बताए गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि उन्हें जिला मुख्यालय से संबद्ध करने का लिखित आदेश कौन सा है, उसमें आरोप और कारण क्या दर्ज हैं तथा कार्रवाई किस तारीख से प्रभावी हुई?
साथ ही, यदि पंकज जायसवाल की शहाबगंज तैनाती पहले ही 18 जुलाई के आदेश संख्या-189 से हो चुकी थी, तो हालिया कार्रवाई में उनकी भूमिका को किस नए आदेश के तहत परिभाषित किया गया—यह भी विभागीय रिकॉर्ड से स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
एक तरफ 18 जुलाई का आदेश तत्काल प्रभाव से पंकज जायसवाल को शहाबगंज भेजने की पुष्टि करता है, वहीं 22 जुलाई को पंकज जायसवाल शहाबगंज में कार्य भार ग्रहण कर लेते हैं तो कल प्रकाशित खबर में उन्हें पूर्णेंदु मिश्रा को हटाए जाने के बाद शहाबगंज की जिम्मेदारी सौंपे जाने की बात क्यों कही गई है। दोनों दस्तावेजों के बीच की टाइमलाइन अब विभागीय स्पष्टीकरण की मांग कर रही है। अब देखना यह है कि विभाग 18 जुलाई के आदेश, कार्यभार ग्रहण की तारीख और पूर्णेंदु मिश्रा के विरुद्ध हुई कार्रवाई का मूल आदेश सार्वजनिक कर इस पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।




