बिजली विभाग पर उठे सवाल, समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी
चकिया (चंदौली):
चकिया विद्युत उपकेंद्र से जुड़े सैदूपुर फीडर क्षेत्र में इन दिनों बिजली संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि क्षेत्र के अधिकांश गांवों में दिनभर बिजली पूरी तरह गायब रहती है, जबकि रात में भी महज 2 से 3 घंटे के लिए ही आपूर्ति की जा रही है। इस अघोषित कटौती से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है और लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली का न होना किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है। दिन के समय जब तापमान अपने चरम पर होता है, तब बिजली न होने के कारण लोग उमस और गर्मी से बेहाल हो जाते हैं। पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरण ठप पड़ जाते हैं, जिससे घरों के अंदर रहना मुश्किल हो जाता है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए यह स्थिति अत्यंत कष्टदायक बन गई है।
रात के समय भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं होता। जब लोगों को दिनभर की थकान के बाद आराम की आवश्यकता होती है, तब भी बिजली की आंख-मिचौली जारी रहती है। महज 2 से 3 घंटे की आपूर्ति से न तो लोगों को पर्याप्त राहत मिल पाती है और न ही दैनिक आवश्यकताएं पूरी हो पाती हैं। मच्छरों के प्रकोप के बीच लोग रात भर जागने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, सैदूपुर फीडर की लाइनें काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं। जंगल क्षेत्र से गुजरने वाली बिजली लाइन अक्सर टूट जाती है, जिससे बार-बार फॉल्ट होता है और आपूर्ति बाधित होती है। कई बार तो तार गिरने के कारण पूरे क्षेत्र में घंटों तक अंधेरा छा जाता है। बावजूद इसके, विभाग द्वारा केवल अस्थायी मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है, जिससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
इस बिजली संकट का असर केवल घरेलू जीवन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर भी पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, क्योंकि रात में पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती। वहीं छोटे व्यवसाय और दुकानदार भी प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि बिजली न होने से उनका काम ठप पड़ जाता है। इसके अलावा पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है। अधिकांश घरों में पानी की आपूर्ति मोटर के माध्यम से होती है, लेकिन बिजली न रहने के कारण पानी भरना भी मुश्किल हो गया है। महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को टाल दिया जाता है, जिससे कुछ समय बाद फिर वही समस्या उत्पन्न हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सैदूपुर फीडर की लाइन को पूरी तरह से बदलकर आधुनिक व्यवस्था नहीं की गई, तो यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि जर्जर तारों को तत्काल बदला जाए, नियमित मॉनिटरिंग की जाए और फॉल्ट की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि जंगल क्षेत्र में लाइन की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। आए दिन पेड़ों के गिरने या अन्य कारणों से तार टूट जाते हैं, जिससे आपूर्ति बाधित होती है। यदि इस क्षेत्र में विशेष निगरानी और रखरखाव किया जाए, तो काफी हद तक समस्या को कम किया जा सकता है।
बिजली संकट के कारण लोगों के दैनिक जीवन में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, किसान अपने कार्य समय पर नहीं कर पा रहे हैं, और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में यह समस्या अब केवल सुविधा का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि अब तक उन्होंने धैर्य बनाए रखा, लेकिन लगातार हो रही अनदेखी के कारण उनका विश्वास टूटता जा रहा है। यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
उपभोक्ताओ की मुख्य समस्याएं:
दिनभर बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप.
रात में भी केवल 2–3 घंटे की सप्लाई.
जर्जर तार और बार-बार लाइन फॉल्ट.
विभाग की लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली.
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
सैदूपुर फीडर की पूरी लाइन तार का नवीनीकरण.
नियमित और निर्धारित समय पर बिजली आपूर्ति.
जंगल क्षेत्र में विशेष निगरानी और सुरक्षा.
शिकायतों का त्वरित एवं स्थायी समाधान.
चकिया क्षेत्र में उत्पन्न यह बिजली संकट अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप ले चुका है। यदि समय रहते बिजली विभाग ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है। जनाक्रोश बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करें और क्षेत्रवासियों को इस भीषण संकट से राहत दिलाएं।




