विकास खंड शहाबगंज कार्यालय की मरम्मत में गुणवत्ता पर उठे सवाल, परिसर में ही आवास होने के बावजूद बीडीओ और जेई-आरईएस की कार्यस्थल पर निगरानी पर ग्रामीणों ने जताई हैरानी
चन्दौली एक्सप्रेस | शहाबगंज। विकास खंड शहाबगंज कार्यालय परिसर में चल रहे मरम्मत एवं निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि लाखों रुपये के प्राक्कलन में निर्माण सामग्री की दरें अधिकतम निर्धारित दरों के आधार पर शामिल की गई हैं, जबकि मौके पर कथित तौर पर दोयम दर्जे की ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थिति यह है कि एक ईंट को दूसरी ईंट से टकराने पर ही वह कई टुकड़ों में टूटकर बिखर जा रही है। इससे निर्माण की मजबूती और उसकी निर्धारित आयु को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। जब सरकारी निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री के इस्तेमाल का प्रावधान है तो लाखों रुपये के प्राक्कलन के बावजूद मौके पर कमजोर सामग्री कैसे पहुंच रही है, यह जांच का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्टीमेट में निर्धारित गुणवत्ता की सामग्री का प्रावधान है और मौके पर दोयम दर्जे की सामग्री लगाई जा रही है तो इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच कर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

मामला केवल वर्तमान मरम्मत कार्य तक सीमित नहीं है। विकास खंड परिसर स्थित ब्लॉक सभागार का वर्ष 2022-23 में लाखों रुपये खर्च कर निर्माण कराया गया था और इसके बाद उद्घाटन हुआ था। निर्माण को अभी चार वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं कि सभागार की छत से पानी टपकने लगा है। बारिश में छत से पानी रिसकर नीचे आने से सभागार की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, सभागार में करीब 8.70 लाख रुपये की लागत से फॉल्स सीलिंग लगाई गई थी, जो पानी टपकने के कारण क्षतिग्रस्त होकर गिरने के कगार पर पहुंच गई है। चार वर्ष भी पूरे होने से पहले लाखों रुपये के निर्माण में ऐसी स्थिति सामने आने से गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मौजूदा निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी को लेकर आरईएस जेई नेहा सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई ग्राम प्रधानों व क्षेत्र पंचायत सदस्यों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में पक्के निर्माण कार्यों के दौरान जेई मौके पर पहुंचकर गुणवत्ता की जांच करती थीं और कमी मिलने पर एमबी में कटौती तक की जाती थी। ऐसे में सवाल है कि ब्लॉक परिसर में इस्तेमाल हो रही कथित दोयम दर्जे की ईंटें उनकी नजर से कैसे बच रही हैं? कार्य दिवसों में अक्सर परिसर में मौजूद रहने के बावजूद यदि सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं गया तो तकनीकी निगरानी किस स्तर पर हो रही है? क्या मौके पर सामग्री की जांच की गई है और यदि की गई तो कमजोर ईंटों को कैसे स्वीकार किया गया? जेई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
विकास खंड परिसर में ही खंड विकास अधिकारी दिनेश सिंह का सरकारी आवास है। ऐसे में लगातार चल रहे निर्माण कार्य में कथित कमजोर सामग्री का इस्तेमाल होना और अधिकारियों की नजर न पड़ना भी सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया है या नहीं? यदि किया है तो कमजोर ईंटों का इस्तेमाल नजर में क्यों नहीं आया और यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो लाखों रुपये का कार्य बिना प्रभावी निगरानी के कैसे कराया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी निर्माण में गुणवत्ता से समझौता होने के कारण भवन कुछ ही वर्षों में खराब होने लगते हैं और फिर मरम्मत के नाम पर दोबारा सरकारी धन खर्च होता है। हालांकि किसी भी अनियमितता अथवा सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में संबंधित उच्चाधिकारियों से वर्तमान कार्य के प्राक्कलन, तकनीकी स्वीकृति, बिल, एमबी और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने के साथ ही वर्ष 2022-23 में बने सभागार की छत से पानी टपकने और करीब 8.70 लाख रुपये की फॉल्स सीलिंग के क्षतिग्रस्त होने की भी जांच कराने की मांग उठ रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कागजों में निर्धारित गुणवत्ता और मौके पर कराए जा रहे निर्माण में कितना अंतर है।




