राजस्व निरीक्षक पर भी कार्रवाई की तैयारी
चंदौली एक्सप्रेस | चकिया, चकिया तहसील क्षेत्र के इलिया गांव में तालाब और भीटे की सरकारी भूमि पर कथित अनियमित तरीके से वरासत दर्ज कर अवैध कब्जा कराने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। उप जिलाधिकारी चकिया विकास मित्तल के निर्देश पर तहसीलदार देवेंद्र कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर दो लेखपालों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं मामले में एक राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध भी कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। इसके अलावा तत्कालीन तहसीलदार और नायब तहसीलदार की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। इस कार्रवाई के बाद पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
जानकारी के अनुसार शहाबगंज विकास खंड के ग्राम सभा इलिया स्थित गाटा संख्या 503, 504, 518, 521क, 523 एवं 524ख राजस्व अभिलेखों में तालाब और भीटे की सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हैं। आरोप है कि इन गाटों में नियमों की अनदेखी कर अभिलेखों में बदलाव करते हुए ऑनलाइन वरासत दर्ज की गई, जिससे सरकारी भूमि पर निजी कब्जे का रास्ता आसान हो गया। मामले की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने इसकी जांच कराई।
बताया जा रहा है कि इस भूमि को लेकर पहले से ही उप जिलाधिकारी चकिया तथा अपर आयुक्त (प्रशासन) वाराणसी मंडल के न्यायालय में वाद लंबित है। न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट आदेश भी दिए गए थे। इसके बावजूद अभिलेखीय कार्रवाई किए जाने को प्रशासन ने गंभीर अनियमितता माना।
तहसीलदार देवेंद्र कुमार की जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि तत्कालीन लेखपाल दिनेश कुमार, जो पिछले दो वर्षों तक इलिया क्षेत्र में तैनात थे, उन्होंने तालाब के भीटे की भूमि को मूल खाते में दर्ज नहीं किया। जांच में यह भी पाया गया कि सरकारी भूमि को सुरक्षित रखने में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हुई।
जांच रिपोर्ट में लेखपाल अखिलेश कुमार और एक राजस्व निरीक्षक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि न्यायालय में वाद लंबित होने के बावजूद ऑनलाइन वरासत दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की गई, जो राजस्व नियमों के विपरीत है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी ने दोनों लेखपालों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध भी कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है। वहीं तत्कालीन तहसीलदार और नायब तहसीलदार की भूमिका की जांच के लिए मंडल स्तरीय टीम गठित की गई है।
उधर जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) तथा सदर उप जिलाधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में खलबली मच गई है। सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर प्रशासन का सख्त रुख भविष्य में भी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।




