ग्रामीण पूछ रहे हैं कब मिलेगी आम लोगों को सुरक्षित सड़कें?
शहाबगंज। भारतमाला परियोजना के निर्माण कार्य में लगी ओवरलोड डंपरों की बेलगाम रफ्तार और अवैध रूप से मिट्टी की ढुलाई अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। बीते दस दिनों के भीतर तीन लोगों की मौत होने से क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त है। और डीएम चंद्र मोहन गर्ग से लोग सवाल कर रहे हैं। बुधवार को धानापुर क्षेत्र निवासी करीब 30 वर्षीय युवक हलचल की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर परियोजना से जुड़े सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भारतमाला परियोजना में मिट्टी ढुलाई के लिए सैकड़ों डंपर दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे हैं। अधिकांश वाहनों में क्षमता से अधिक मिट्टी लादी जा रही है, जिससे न केवल सड़क सुरक्षा प्रभावित हो रही है बल्कि लगातार दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। लोगों का आरोप है कि डंपर चालक तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाते हैं, जिसके चलते आम राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की जान जोखिम में बनी रहती है।

ग्रामीणों के अनुसार कर्मनाशा नदी के किनारे कई स्थानों पर 10 से 20 फीट गहरे गड्ढे खोदकर बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह कार्य लंबे समय से जारी है, लेकिन इसे रोकने के लिए न तो खनन विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई की गई और न ही प्रशासन ने सख्ती दिखाई। ग्रामीणों का कहना है कि खुलेआम हो रहे खनन और ओवरलोडिंग की जानकारी जिम्मेदार विभागों को होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद अब लोगों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? खनन विभाग, जिला प्रशासन, परियोजना से जुड़ी कार्यदायी संस्था या फिर ओवरलोड वाहनों को संरक्षण देने वाले लोग? क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो आगे भी ऐसे हादसे होते रहेंगे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड डंपरों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो तथा कर्मनाशा नदी के किनारे हो रहे अवैध मिट्टी खनन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। लोगों का कहना है कि तीन मौतों के बाद भी यदि व्यवस्था नहीं जागी तो जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।




