चकिया

बिना कनेक्शन चल रहा समरसेबल! घुरहुपुर बौद्ध स्थल की बिजली व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

बिहार का ट्रांसफार्मर, यूपी की बिजली और टंकी पर समरसेबल, जिम्मेदार कौन?

इलिया (चंदौली)। क्षेत्र के घुरहुपुर स्थित बौद्ध स्थल पर स्थापित पेयजल टंकी और वहां की विद्युत व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहाड़ के ऊपर बनी पानी की टंकी तक बिजली पहुंचाने के लिए जिस विद्युत लाइन का उपयोग किया जा रहा है, उसकी वैधता और विभागीय स्वीकृति संदिग्ध दिखाई दे रही है। इतना ही नहीं, इसी सप्लाई से पानी टंकी पर लगा समरसेबल पंप भी संचालित किया जा रहा है, जबकि मौके पर नियमित विद्युत कनेक्शन होने के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इस मामले में सबसे बड़ा प्रश्न जिम्मेदारी का है। यदि ट्रांसफार्मर और लाइन का निर्माण विभागीय स्वीकृति से हुआ है तो संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। वहीं यदि किसी संस्था, समिति अथवा अन्य माध्यम से यह कार्य कराया गया है तो उसके दस्तावेज और स्वीकृतियां भी उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन जब स्थानीय स्तर पर पूछताछ करने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा जानकारी न होने की बात कही जा रही है तो संदेह और गहरा जाता है।
चकिया विद्युत विभाग के एसडीओ संतोष सिंह से इस संबंध में जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है तथा विस्तृत जानकारी जिला कार्यालय स्तर से प्राप्त की जा सकती है। एसडीओ के इस बयान के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि यदि स्थानीय विद्युत अधिकारियों को ही इसकी जानकारी नहीं है तो फिर ट्रांसफार्मर स्थापना, लाइन निर्माण और बिजली आपूर्ति का कार्य किसकी निगरानी में हुआ।

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिला प्रशासन, विद्युत विभाग तथा संबंधित विकास विभागों को संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच करानी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ट्रांसफार्मर किस योजना के तहत लगाया गया, लाइन निर्माण की स्वीकृति किसने दी, पानी टंकी पर विद्युत कनेक्शन वैध है या नहीं तथा समरसेबल संचालन का खर्च किस मद से वहन किया जा रहा है।

फिलहाल घुरहुपुर बौद्ध स्थल की बिजली व्यवस्था और पानी टंकी पर चल रहे समरसेबल को लेकर उठे सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे में क्षेत्रीय जनता यही पूछ रही है कि यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो अभिलेख सामने क्यों नहीं लाए जा रहे हैं, और यदि अनियमितता हुई है तो आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? प्रशासनिक जांच ही इन सवालों के जवाब दे सकती है।

Chandauli Express

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