सेमरा में मातृभूमि सेवा ट्रस्ट के सेवा शिविर में उमड़ा श्रद्धा, संस्कार और संगीत का संगम, समाजसेवी अजय सिंह ने कहा—सेवा ही असली पूजा
चंदौली एक्सप्रेस।
शहाबगंज (चंदौली)। सेमरा बगीचे में हर शनिवार को मातृभूमि सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित सेवा शिविर में सेवा, संस्कार और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों द्वारा संचालित सेवा शिविर में आयोजित संगीतमय कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि देर तक श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुरों की गंगा में गोते लगाते रहे। कार्यक्रम में क्षेत्र के साथ ही आसपास के लोगों की भी बड़ी संख्या में सहभागिता रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं प्रार्थना सभा के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने महामना के विचारों को याद करते हुए सेवा और समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत वातावरण में सेवा शिविर की गतिविधियों को लेकर लोगों ने आयोजन की सराहना की।

इसके बाद आयोजित संगीत संध्या में पूज्य गुरुदेव एवं जाने-माने कलाकार पंडित मंगला पाठक, मशहूर गायक उस्ताद आफताब ‘अली कैमूरी’, विख्यात क्रिएटर पंडित महानंद मिश्रा, प्रसिद्ध गायक नंदलाल विश्वकर्मा तथा चकिया के लाल और भोजपुरी गौरव राजेश विश्वकर्मा ‘राजू’ ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने भक्ति, लोक और भोजपुरी गीतों के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। एक के बाद एक प्रस्तुतियों पर तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंजता रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी के समाजसेवी अजय सिंह ने कहा कि “सेवा ही असली पूजा है। यही रामायण है, यही गीता है।” उन्होंने कहा कि समाज में जरूरतमंदों की मदद और मानवता की सेवा से बड़ा कोई कार्य नहीं है। सेवा भाव को निरंतर आगे बढ़ाने की जरूरत है।
पूज्य गुरुदेव लल्लन सिंह ने सेवा शिविर की निरंतर चल रही गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि सेवा के इस भाव को देखकर उनका मन गद्गद हो जाता है। निस्वार्थ भाव से किया गया सेवा कार्य समाज में आशा, करुणा और मानवता का प्रकाश फैलाता है।
कार्यक्रम के संयोजक संजय कुमार सिंह ने कहा कि ऋषितुल्य मार्गदर्शकों, शुभचिंतकों और सहयोगियों के निरंतर आशीर्वाद से सेवा शिविर की सेवा-साधना आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि मानवता की सेवा को अपना धर्म मानने वाले संवेदनशील लोगों की सामूहिक साधना है।

कार्यक्रम का संचालन सुबाष विश्वकर्मा ने किया। ओम प्रकाश सिंह ‘लकड़ू’ ने अतिथियों, कलाकारों, सहयोगियों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर बद्री प्रसाद सिंह, डॉ. मनोज, डॉ. अजय, पत्रकार इबरार, तसलीम, गुड्डू, दिलीप, रामकुमार, राधेश्याम, सुमंत, डीके, धर्मेंद्र, संदीप मौर्य, रामनिवास प्रधान, सत्यानंद, डॉ. विजयकांत, नंदलाल, विशेशर राम, तरुण सिंह, ओमप्रकाश सिंह, सुबाष सिंह, मोछू भैया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सेवा और संगीत से सजा यह आयोजन लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब सेवा भाव के साथ कला और संस्कार जुड़ते हैं तो आयोजन समाज को जोड़ने और मानवता के प्रति संवेदना जगाने का माध्यम बन जाता है।




