विभाग के कार्रवाई पर उठे सवाल
इलिया (चंदौली)। सैदूपुर बाजार में पान-जूस और लस्सी की ऐसी दुकान, जहां न तो तराजू है और न ही किसी सामान की बिक्री तौल के आधार पर की जाती है, वहां बाट-माप विभाग की कार्रवाई का मामला चर्चा में है। दुकानदार को न्यायालय में उपस्थित होकर आरोप का जवाब देने के लिए नोटिस जारी होने के बाद कार्रवाई के आधार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त नोटिस में दुकानदार का नाम अजय जायसवाल, निवासी सैदूपुर बाजार, चंदौली दर्ज है। नोटिस में उसे न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर लगाए गए आरोप के संबंध में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। नोटिस मिलने के बाद दुकानदार ने कार्रवाई को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि उसकी दुकान पर किसी प्रकार का तराजू, बाट अथवा अन्य माप-तौल उपकरण मौजूद नहीं है।
दुकानदार के अनुसार दुकान पर पान, जूस, लस्सी सहित अन्य सामान की बिक्री की जाती है, लेकिन इनमें से किसी वस्तु को वजन के आधार पर तौलकर ग्राहकों को नहीं बेचा जाता। ऐसे में बाट-माप विभाग की ओर से किस आधार पर कार्रवाई की गई, यह उसके लिए भी स्पष्ट नहीं है।
कार्रवाई के आधार पर उठ रहे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि संबंधित दुकान पर माप-तौल का कोई उपकरण ही नहीं है और वहां सामान की बिक्री वजन के आधार पर नहीं की जाती, तो विभाग ने किस नियम अथवा किस आधार पर कार्रवाई की। क्या विभाग की ओर से दुकान को माप-तौल संबंधी किसी ऐसे प्रावधान के तहत नोटिस दिया गया है, जो बिना तराजू वाले दुकानदार पर भी लागू होता है? इसका जवाब संबंधित विभाग के पक्ष के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
दुकानदार का कहना है कि उसे नोटिस में लगाए गए आरोप और कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं है। वह न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखेगा और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले को स्पष्ट करेगा।
विभाग का पक्ष सामने आने पर स्थिति होगी स्पष्ट
हालांकि, केवल दुकानदार के कथन के आधार पर कार्रवाई को गलत ठहराना भी उचित नहीं होगा। बाट-माप विभाग ने किस प्रावधान के तहत नोटिस जारी किया है, दुकान पर विभागीय निरीक्षण के दौरान क्या पाया गया था और नोटिस में वास्तविक आरोप क्या दर्ज हैं, इन सभी बिंदुओं पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण है।
मामले में विभाग की ओर से यदि यह स्पष्ट किया जाता है कि दुकान पर किसी ऐसी वस्तु या लेनदेन को लेकर नियमों का उल्लंघन पाया गया था, जिस पर बाट-माप कानून के प्रावधान लागू होते हैं, तो कार्रवाई का आधार सामने आ सकेगा। वहीं यदि दुकान पर माप-तौल से संबंधित कोई उपकरण या गतिविधि नहीं पाई गई थी, तो कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भी विभाग को देना होगा।
फिलहाल बिना तराजू वाली पान-जूस, लस्सी की दुकान को बाट-माप विभाग की ओर से न्यायालय संबंधी नोटिस दिए जाने का मामला सैदूपुर बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें विभाग के स्पष्टीकरण और न्यायालय में दुकानदार की ओर से रखे जाने वाले पक्ष पर टिकी हैं।




