जलनिकासी के लिए किसानों ने जेसीबी से तुड़वाया 15 साल पुराना रेगुलेटर
चन्दौली एक्सप्रेस | इलिया। शहाबगंज विकासखंड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते बरांव, हरौड़ा, कवलपुरवां, जिगना, घोड़सारी, खिलची, अमिलिया और पचपरां समेत आसपास के कई गांवों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी का दबाव बढ़ गया है और बड़ी संख्या में धान के खेत जलमग्न हो गए हैं। कई दिनों से पानी में डूबी धान की फसल अब गलने लगी है, जिससे किसानों के सामने फसल बर्बाद होने का संकट खड़ा हो गया है।
जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही थी। खेतों में जमा पानी की निकासी नहीं होने पर किसानों ने पचपरां गांव में करीब 15 वर्ष पूर्व बनाए गए रेगुलेटर को जेसीबी लगवाकर तुड़वा दिया। किसानों का कहना है कि रेगुलेटर के कारण बारिश और बाढ़ का पानी आगे नहीं निकल पा रहा था, जिसके चलते आसपास के खेतों में पानी जमा हो गया था। किसानों ने अपने स्तर से रेगुलेटर को तुड़वाकर पानी की निकासी का रास्ता खोलने का प्रयास किया है।

रेगुलेटर टूटने के बाद पानी की निकासी शुरू होने से किसानों को उम्मीद है कि खेतों में जमा पानी धीरे-धीरे कम होगा और बाढ़ जैसे हालात से कुछ राहत मिल सकेगी। हालांकि किसानों का कहना है कि लगातार बारिश जारी रहने की स्थिति में केवल रेगुलेटर तोड़ने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए क्षेत्र में व्यवस्थित और स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था जरूरी है।
किसानों के मुताबिक शहाबगंज क्षेत्र के कई गांवों में इस समय धान की फसल खेतों में खड़ी है। लगातार कई दिनों तक खेतों में पानी भरा रहने से पौधों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर फसल गिरने के साथ ही सड़ने और गलने की स्थिति में पहुंच गई है। यदि जल्द पानी नहीं निकला तो सैकड़ों बीघा धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ आगामी खेती पर भी असर पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान क्षेत्र के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को बार-बार इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कराकर पानी की निकासी के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं और भविष्य के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे बारिश का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा न रहे।
रेगुलेटर तोड़े जाने के दौरान मौके पर बांधी डिवीजन के एई हीरा लाल यादव, जेई आजेश्वर सिंह, थानाध्यक्ष चंदन राय समेत बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे। मौके पर किसान बंटी सिंह, बाबिल सिंह, किसान नेता राम अवध सिंह, पिंटू सिंह सहित दर्जनों किसानों ने अधिकारियों को क्षेत्र में बने जलभराव की स्थिति और फसल को हो रहे नुकसान से अवगत कराया।
किसानों ने अधिकारियों से मांग की कि प्रभावित गांवों में जलभराव की स्थिति का तत्काल सर्वे कराया जाए और जिन किसानों की धान की फसल पानी में डूबकर खराब हुई है, उनके नुकसान का आकलन कराकर नियमानुसार सहायता दिलाई जाए। साथ ही पचपरां सहित आसपास के गांवों में स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग भी की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो बारिश का पानी खेतों में जमा रहने से फसल नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है। किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल कार्रवाई करते हुए जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है, ताकि क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति से राहत मिलने के साथ किसानों की बची हुई फसल को भी सुरक्षित किया जा सके।




