परिजनों का दावा—ऑपरेशन के बाद यूट्रस के रास्ते आने लगा पेशाब, पति ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की उठाई मांग
चंदौली। जिले के एक निजी अस्पताल में यूट्रस का ऑपरेशन कराने के बाद 35 वर्षीय डेहरी कला निवासी शशिकला की हालत बिगड़ने का मामला सामने आया है। महिला के पति राम सिंह ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए संबंधित अस्पताल और जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन के बाद से ही महिला को पेशाब संबंधी गंभीर समस्या होने लगी और उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। फिलहाल मरीज का इलाज सर सुंदरलाल चिकित्सालय वाराणसी पर कराया जा रहा है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

परिजनों के अनुसार महिला के यूट्रस का ऑपरेशन आठ जून को चंदौली स्थित डा आरडी मेमोरियल हॉस्पिटल में 8 जून को कराया गया था। ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक महिला अस्पताल में भर्ती रही। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद परिजनों ने पाया कि महिला को सामान्य तरीके से पेशाब होने में परेशानी हो रही है और यूट्रस के रास्ते लगातार तरल व पेशाब जैसा स्राव आने लगा। इसके साथ ही महिला को पेट में दर्द, बुखार और कमजोरी की शिकायत भी होने लगी।
परिजनों का आरोप है कि महिला की समस्या लगातार बढ़ने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिजन उसे इलाज और जांच के लिए वाराणसी ले गए। वाराणसी स्थित सर सुंदरलाल चिकित्सालय में चिकित्सकीय परामर्श लेने के साथ ही अन्य जांच कराई गई। परिजनों का दावा है कि जांच के दौरान पेशाब की नली को यूट्रस से जोड़ा जाना सीटी स्कीन के रिपोर्ट मे साफ दिखाई दे रहा है।
महिला के पति राम सिंह का आरोप है कि यूट्रस के ऑपरेशन के दौरान पेशाब ले जाने वाली नली यानी यूरेटर से संबंधित जटिलता उत्पन्न हुई। उनका कहना है कि इसी कारण महिला को सामान्य रास्ते के बजाय यूट्रस के रास्ते पेशाब आने की समस्या हो रही है। हालांकि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही जिम्मेदार है रिपोर्ट से साफ पता चलता है।
वहीं, बाद में कराए गए सीटी स्कैन की रिपोर्ट में भी कई गंभीर चिकित्सकीय निष्कर्षों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन के बाद पेल्विस के बाईं ओर लगभग 177 सीसी का संक्रमित कलेक्शन पाया गया है। रिपोर्ट में इस कलेक्शन का संबंध सर्वाइकल स्टंप से होने का उल्लेख है। इसके अलावा बाईं ओर की यूरेटर और सर्वाइकल स्टंप के बीच फिस्टुलस कम्युनिकेशन यानी असामान्य रास्ता बनने की आशंका भी रिपोर्ट में जताई गई है।

सीटी स्कैन रिपोर्ट में यूरेटर में रुकावट के कारण बाईं किडनी और पेशाब की नली पर हल्का प्रभाव पड़ने यानी हाइड्रोयूरेटरोनेफ्रोसिस का भी उल्लेख किया गया है। इन निष्कर्षों के सामने आने के बाद परिजन महिला की स्थिति को लेकर चिंतित हैं।
पति राम सिंह का कहना है कि ऑपरेशन से पहले महिला की स्थिति सामान्य थी, लेकिन ऑपरेशन और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पेशाब संबंधी गंभीर परेशानी शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि समय रहते समस्या की गंभीरता को समझकर उचित जांच और उपचार किया जाता तो मरीज की हालत इतनी खराब नहीं होती। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
राम सिंह ने कहा कि मेडिकल विशेषज्ञों की टीम गठित कर ऑपरेशन से संबंधित अभिलेखों, जांच रिपोर्ट और मरीज की वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाए। जांच में जिसकी भी जिम्मेदारी तय हो, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही मरीज के समुचित इलाज की व्यवस्था कराई जाए।
फिलहाल महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है और परिजन उसके इलाज में जुटे हुए हैं। मामले में डा आरडी मेमोरियल हॉस्पिटल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सक का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। अस्पताल प्रबंधन या चिकित्सक का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार आपरेशन के दौरान चिकित्सक से भारी चुक हुई है। अब देखना है कि जिला प्रशासन उक्त चिकित्सालय के खिलाफ कौन सी कार्रवाई करता है। या फिर ऐसे ही जान का सौदागर बनता रहेगा।




