विधायक कैलाश आचार्य और चेयरमैन गौरव श्रीवास्तव भी करेंगे सहयोग, पांच लाख की एफडीआर से सुरक्षित होगा बेटी का भविष्य
चंदौली एक्सप्रेस | शहाबगंज।
दुख की घड़ी में अपनों का साथ ही सबसे बड़ा संबल होता है। इसी भावना के साथ विकासखंड शहाबगंज के घोड़सारी गांव निवासी स्वर्गीय इंद्रमणि दुबे के परिवार की मदद के लिए जनप्रतिनिधियों ने संवेदनशील पहल की है। किसान मोर्चा के मंडल अध्यक्ष रहे इंद्रमणि दुबे के असामयिक निधन के बाद उनकी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से कुल पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। यह धनराशि बेटी के नाम से एफडीआर बनवाकर दी जाएगी, ताकि जरूरत के समय उसके काम आ सके और विवाह के समय परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय इंद्रमणि दुबे और बटौवा निवासी प्रतीक पांडेय भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होकर चंदौली से लौट रहे थे। इसी दौरान चंदौली बाजार में सड़क दुर्घटना हो गई। हादसे के बाद उपचार के दौरान इंद्रमणि दुबे का निधन हो गया। उनके असामयिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं, क्षेत्र के लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं में भी शोक व्याप्त है।
इंद्रमणि दुबे को याद करते हुए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह ने कहा कि वह लंबे समय से उन्हें जानते थे। इंद्रमणि दुबे पार्टी के प्रति समर्पित, कर्मठ और संगठन को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करने वाले कार्यकर्ता थे। उनका निधन व्यक्तिगत रूप से भी दुखद है। वह क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे। ऐसे में उनके परिवार, विशेषकर बेटी के भविष्य की चिंता करना हम सभी का दायित्व है।
इसी उद्देश्य से छत्रबली सिंह की ओर से ढाई लाख रुपये, चकिया विधायक कैलाश आचार्य की ओर से दो लाख रुपये तथा चकिया नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव की ओर से 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इस प्रकार कुल पांच लाख रुपये की धनराशि बेटी के नाम से एफडीआर के रूप में बनवाकर दी जाएगी।
इस पहल के माध्यम से परिवार को आर्थिक सहारा देने के साथ यह भरोसा भी दिलाया गया है कि विपरीत परिस्थितियों में वे अकेले नहीं हैं। छत्रबली सिंह ने परिवार को आश्वस्त किया कि भविष्य में भी किसी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर हरसंभव मदद की जाएगी।
दिवंगत कार्यकर्ता के परिवार के प्रति यह पहल सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना का संदेश देती है। इंद्रमणि दुबे के निधन से हुई क्षति की भरपाई तो संभव नहीं है, लेकिन उनकी बेटी के भविष्य को संवारने के लिए उठाया गया यह कदम परिवार के लिए संबल बन सकता है।




