प्रभारी चिकित्साधिकारी समेत पांच डॉक्टरों पर समय से अस्पताल न पहुंचने का आरोप
शहाबगंज, चंदौली। क्षेत्रीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शहाबगंज की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शासन द्वारा अस्पताल खुलने का समय सुबह 8 बजे निर्धारित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल में तैनात चिकित्सक समय से नहीं पहुंच रहे हैं। मंगलवार को भी सुबह 10 बजे तक अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला, जिससे दूर-दराज से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्थानीय लोगों और मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में पांच-पांच डॉक्टरों की तैनाती के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। मरीज घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंचते। सबसे ज्यादा नाराजगी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एल.बी. शर्मा को लेकर है। लोगों का कहना है कि उनका सरकारी आवास शहाबगंज में ही मौजूद है, इसके बावजूद वह यहां रुकने के बजाय प्रतिदिन वाराणसी से आते-जाते हैं। इसका सीधा असर अस्पताल की व्यवस्था पर पड़ रहा है।
मरीजों ने बयां किया दर्द
अस्पताल पहुंचे मरीज बृजराज, रवि कुमार, चंद्रकला देवी, मंजू, चंद्रावती, बिपिन और भानू ने बताया कि वह लोग सुबह से इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंचे हैं, लेकिन एक घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचा। मरीजों ने कहा कि भीषण गर्मी में छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर अस्पताल परिसर में इंतजार करना काफी मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।
मरीजों का कहना था कि जब अस्पताल समय से नहीं खुलेगा और डॉक्टर ही मौजूद नहीं रहेंगे तो गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इलाज कैसे मिलेगा। कई मरीजों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों की लापरवाही के कारण लोगों का भरोसा टूटता जा रहा है।
गर्मी में मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

भीषण गर्मी के बीच गांवों से आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अस्पताल परिसर में घंटों डॉक्टरों के इंतजार में बैठे रहते हैं। कई मरीज बिना इलाज कराए वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं। अस्पताल परिसर में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लगी रही, लेकिन डॉक्टरों के न पहुंचने से लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दी।
पहले भी छप चुकी है लापरवाही की खबर
गौरतलब है कि दो दिन पूर्व भी चिकित्सकों के समय से अस्पताल न पहुंचने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह है कि डॉक्टरों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रहा आक्रोश
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्वास्थ्य विभाग ने लापरवाह चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो आम जनता को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। लोगों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।




