जल जीवन मिशन की व्यवस्था पर सवाल, छह माह बाद भी टेस्टिंग नहीं; शिकायत के बावजूद जिम्मेदारों ने नहीं की जांच, एक ऑपरेटर के भरोसे 24 घंटे संचालन
चन्दौली एक्सप्रेस | इलिया (चंदौली)। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन शहाबगंज विकासखंड के ग्राम पंचायत बेन में योजना की जमीनी हकीकत व्यवस्था की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े कर रही है। यहां करीब 20 लाख रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी में पानी भरते ही तेज गति से रिसाव शुरू हो जाता है। टंकी से नीचे गिरता पानी किसी झरने की तरह दिखाई देता है, जिससे आसपास रहने वाले ग्रामीणों और ऑपरेटर में दहशत का माहौल बना हुआ है।

मौके पर लगे जल जीवन मिशन के बोर्ड पर कार्यदायी संस्था के रूप में आयन एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड का नाम दर्ज है। बोर्ड पर योजना का नाम बेन ग्राम पंचायत पेयजल योजना तथा योजना की लागत ₹215.75 लाख अंकित है। बोर्ड पर 13 दिसंबर 2021 की तिथि भी दर्ज है। वहीं योजना के तहत एक गांव को लाभान्वित करने, 2964 की वर्तमान लाभार्थी जनसंख्या और 486 गृह जल संयोजन का विवरण भी दर्ज है। बोर्ड पर जलापूर्ति से संबंधित अन्य तकनीकी विवरण भी अंकित हैं। ऐसे में टंकी में लगातार हो रहे रिसाव ने योजना के निर्माण, परीक्षण और रखरखाव व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार करीब छह माह पहले टंकी का निर्माण पूरा हुआ था, लेकिन अब तक इसकी विधिवत टेस्टिंग नहीं कराई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आयन एक्सचेंज की ओर से टंकी की टेस्टिंग नहीं कराई गई और इसके बावजूद उसमें पानी भरकर गांवों में आपूर्ति की जा रही है। पानी भरते ही टंकी से तेज रिसाव शुरू हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण के बाद निर्धारित तकनीकी परीक्षण कराया गया होता तो रिसाव जैसी समस्या सामने आने पर समय रहते उसका समाधान किया जा सकता था।

ग्रामीणों के मुताबिक टंकी में हो रहे रिसाव की जानकारी संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई अधिकारी अथवा तकनीकी कर्मचारी मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच करने नहीं आया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि लाखों रुपये की योजना में यदि पानी की टंकी पानी रोकने में ही सक्षम नहीं है और शिकायत के बावजूद तकनीकी जांच नहीं कराई जा रही है तो सरकारी धन के उपयोग और गुणवत्ता की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों को यह भी आशंका है कि रिसाव की समस्या को समय रहते दूर नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
वहीं, ग्राम पंचायत बेन और आसपास के गांवों में जल जीवन मिशन के तहत घरों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी प्रभावित बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार बेन-धरौली सड़क चौड़ीकरण के दौरान मुख्य मार्ग की खोदाई करते समय जेसीबी से योजना की मेन पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद से कई घरों तक जलापूर्ति बाधित है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को समय से दुरुस्त नहीं कराया गया, जिससे योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी भी महज एक ऑपरेटर के भरोसे होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक ऑपरेटर को करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जबकि उससे टंकी के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी चौबीसों घंटे निभाने की अपेक्षा की जाती है। एक ही व्यक्ति पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी होने से आपात स्थिति में व्यवस्था संभालने और उसकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले को लेकर आयन एक्सचेंज के डीसी देवव्रत चक्रवर्ती ने बताया कि पानी की टंकी में रिसाव का मामला उनके संज्ञान में है। इसकी मरम्मत के लिए दिल्ली स्थित कार्यदायी संस्था को सूचना दे दी गई है और जल्द ही टंकी से हो रहे रिसाव को ठीक कराया जाएगा।
वहीं, पत्रकार द्वारा मामले को लेकर सवाल पूछे जाने पर डीसी का कथित तौर पर यह कहना कि “आप पत्रकार हैं या सीआईडी के हैं”, भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब लाखों रुपये की सरकारी योजना में तकनीकी खामी सामने आ रही है तो उसकी जानकारी लेना और जिम्मेदारों से जवाब मांगना पत्रकारिता का सामान्य दायित्व है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मामले की तत्काल तकनीकी जांच कराने, टंकी की टेस्टिंग अब तक नहीं होने के कारणों की जांच करने, कार्यदायी संस्था की भूमिका की जांच कराने, रिसाव की वजह और निर्माण गुणवत्ता की जांच करने, क्षतिग्रस्त मेन पाइपलाइन को दुरुस्त कर जलापूर्ति बहाल कराने तथा योजना के निर्माण और रखरखाव में खर्च हुए सरकारी धन की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की टंकी से इस समय झरने की तरह पानी गिर रहा है। यदि विभाग ने समय रहते मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो यही लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।




