सार्वजनिक जल स्रोत बचाने की अपील
शहाबगंज (चंदौली)।
तहसील चकिया क्षेत्र के ग्राम सभा अतायस्तगंज में स्थित आराजी संख्या 200, रकबा लगभग 13.5 बिस्वा की सार्वजनिक भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को संबोधित शिकायत पत्र भेजकर सार्वजनिक जल स्रोत को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त भूमि राजस्व अभिलेखों में गड्ढी (सार्वजनिक जल स्रोत) के रूप में दर्ज है। यह जल स्रोत वर्षा जल के संरक्षण, भूजल स्तर बनाए रखने तथा पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ लोगों द्वारा इस सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे जल स्रोत का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
शिकायतकर्ताओं ने पत्र में उल्लेख किया है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, सरोवर, पोखर, नदी तथा अन्य सार्वजनिक जल स्रोतों के संरक्षण से संबंधित शासनादेशों एवं उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भविष्य में वर्षा जल संचयन प्रभावित होगा, भूजल स्तर में गिरावट आएगी और गांव के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और अवैध कब्जा तत्काल हटाने की मांग की है।शिकायत पत्र में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि राजस्व विभाग को निर्देश देकर सार्वजनिक भूमि की पैमाइश कराई जाए, अवैध निर्माण हटवाया जाए तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि गांव की सार्वजनिक संपत्ति और जल स्रोत सुरक्षित रह सकें।




