मस्ट्रोल जारी करने से लेकर सत्यापन तक भेदभाव की चर्चा, जनप्रतिनिधियों ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
चन्दौली एक्सप्रेस | शहाबगंज ! शहाबगंज विकास खंड में मनरेगा कार्यों के संचालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्यों में खंड विकास अधिकारी स्तर से क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के प्रति अलग-अलग रवैया अपनाया जा रहा है। मस्ट्रोल जारी करने से लेकर कार्यों के सत्यापन तक कथित भेदभाव की चर्चा क्षेत्र में तेजी से हो रही है।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र पंचायत के माध्यम से कराए जा रहे मनरेगा कार्यों में एक आईडी पर सीमित संख्या में श्रमिकों का मस्ट्रोल जारी करने का निर्देश दिया जाता है, जबकि ग्राम पंचायतों के कार्यों में इस प्रकार की बाध्यता देखने को नहीं मिलती। इससे क्षेत्र पंचायत के कार्यों की गति प्रभावित होने के साथ-साथ रोजगार सृजन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत दोनों ही मनरेगा की मान्यता प्राप्त कार्यदायी संस्थाएं हैं, तो फिर दोनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था क्यों लागू की जा रही है। उनका तर्क है कि यदि कोई नियम या सीमा निर्धारित है तो उसका पालन सभी संस्थाओं पर समान रूप से होना चाहिए।
मामला केवल मस्ट्रोल जारी करने तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। क्षेत्र पंचायत से जुड़े लोगों का आरोप है कि कार्यों के सत्यापन, माप पुस्तिका (एमबी) की प्रक्रिया और भुगतान संबंधी औपचारिकताओं में भी अलग दृष्टिकोण अपनाया जाता है। इससे विकास कार्यों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराना और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। ऐसे में यदि किसी कार्यदायी संस्था पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं और दूसरी को छूट दी जाती है, तो यह व्यवस्था स्वाभाविक रूप से सवालों के घेरे में आएगी।
मनरेगा में पारदर्शिता की कसौटी यह है कि नियम व्यक्ति या संस्था के आधार पर नहीं, बल्कि कार्य और शासनादेश के आधार पर लागू हों। यदि किसी प्रकार की सीमा निर्धारित है तो उसे लिखित आदेश के रूप में सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पारदर्शिता तभी साबित होगी जब मस्ट्रोल निर्गत करने से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया सभी कार्यदायी संस्थाओं के लिए समान रूप से लागू हो। यदि अलग-अलग मानक अपनाए जा रहे हैं तो उसके पीछे के कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब योजना, बजट, पोर्टल और दिशा-निर्देश एक ही हैं, तो फिर शहाबगंज विकास खंड में क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत के लिए अलग-अलग कार्यप्रणाली क्यों दिखाई दे रही है? यदि नियमों में अंतर नहीं है तो इस कथित भेदभाव की वजह क्या है? यही सवाल अब जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि विकास खंड स्तर पर मनरेगा कार्यों की समीक्षा कर मस्ट्रोल निर्गत करने, एनएमएमएस उपस्थिति, कार्य सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े सभी मानकों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि योजना के संचालन में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार के भेदभाव की आशंका समाप्त हो सके।





मनोज तिवारी
24/06/2026Good 👍