प्रधानाचार्य पर कार्रवाई को लेकर तहसील में गरजे ग्रामीण, डीएम को मौके पर बुलाने की मांग
चकिया (चंदौली)। आदित्य नारायण राजकीय इंटर कॉलेज में स्वतंत्रता दिवस के दिन छात्र को बिना यूनिफॉर्म आने पर कथित रूप से उठक-बैठक कराने और मारपीट के आरोप का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र के साथ कथित मारपीट के मामले में प्रधानाचार्य के निलंबन और आवश्यक कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार को भीम आर्मी के शैलेंद्र भारती के नेतृत्व में ग्रामीण तहसील परिसर में धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि विद्यालय में छात्र के साथ जिस तरह का व्यवहार किए जाने का आरोप सामने आया है, वह गंभीर मामला है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्र के साथ कथित मारपीट और स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान छात्रों के सामने उठक-बैठक कराए जाने के मामले की जांच कराकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रधानाचार्य को तत्काल निलंबित करने की मांग उठाई।
जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग
धरनारत ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और मामले में तत्काल कार्रवाई का आश्वासन देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

बताते चलें कि स्वतंत्रता दिवस के दिन आदित्य नारायण राजकीय इंटर कॉलेज में एक छात्र के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया था। छात्र रितेश मौर्य ने प्रधानाचार्य पर बिना यूनिफॉर्म विद्यालय पहुंचने पर बाल खींचने और पीठ पर कोहनी से मारने का आरोप लगाया था। परिजनों ने घर पहुंचने के बाद छात्र की तबीयत बिगड़ने और चक्कर आने का दावा भी किया था।
वहीं, स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें छात्रों के सामने एक छात्र को उठक-बैठक कराए जाने का दावा किया गया। हालांकि वीडियो की परिस्थितियों और छात्र से मारपीट के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, छात्र और उसके परिजनों के बयान दर्ज करने तथा आरोप सही पाए जाने पर प्रधानाचार्य के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से मामले में क्या निर्णय लिया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।




