ढुन्नू ग्राम पंचायत में धान की रोपाई के बीच चकरोड पर मिट्टी कार्य का दावा, प्रतिदिन करीब 88 मजदूरों की NMMS हाजिरी; ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
चंदौली एक्सप्रेस | शहाबगंज
शहाबगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत ढुन्नू में वीबी-ग्रामजी के तहत कराए जा रहे कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम पंचायत में बलदाऊ मास्टर के खेत से रामअवध के खेत तक चकरोड पर मिट्टी कार्य कराया जाना दर्शाया गया है, जबकि कार्यस्थल की तस्वीरें और वीबी-ग्रामजी पोर्टल पर उपलब्ध विवरण स्थानीय लोगों के आरोपों को नया आधार दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि चकरोड के दोनों ओर धान की रोपाई पूरी हो चुकी है और खेतों में पानी लबालब भरा हुआ है। इतना ही नहीं, कार्यस्थल के समीप से गुजरने वाली लतीफशाह राइट कर्मनाशा से निकली पालपुर–गोविंदीपुर शाख नहर में पिछले जून महीने से ही पूरी क्षमता के साथ पानी का संचालन हो रहा है। नहर का पानी आसपास के खेतों में भर जाने के कारण पूरा क्षेत्र जलमग्न है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब खेतों में पानी भरा है और धान की रोपाई अपने चरम पर है, तब आखिर चकरोड पर मिट्टी का कार्य किस प्रकार कराया जा रहा है।
दूसरी ओर, एनएमएमएस पोर्टल पर इसी कार्य के लिए प्रतिदिन लगभग 88 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौके पर एक भी मजदूर कार्य करता दिखाई नहीं देता, जबकि ग्राम रोजगार सेवक द्वारा लगातार घर बैठे एनएमएमएस उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
आरोप यह भी है कि 14 दिन का मस्टररोल पूरा होने के बाद पुरानी तस्वीरें फाइल में लगाकर उसे तकनीकी सहायक के पास भेज दिया जाता है, जहां कार्यालय में बैठे-बैठे ही कार्य का मापन कर दिया जाता है। इसके बाद बिना स्थलीय सत्यापन के फाइल पर हस्ताक्षर कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह न केवल वीबी-ग्रामजी की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था बल्कि जियो-टैगिंग, ई-एमबी और एनएमएमएस प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले ऑफलाइन व्यवस्था होने के कारण कागजी विकास की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। कार्य स्वीकृति से लेकर वर्क आईडी जारी होने, मस्टररोल, एनएमएमएस उपस्थिति, ई-एमबी के सत्यापन और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित हो रही है। इसके बावजूद यदि धरातल पर कार्य न हो और रिकॉर्ड में प्रतिदिन ऑनलाइन मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होती रहे, तो यह पूरी ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उनका कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी एक बार भी मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण कर लें तो वास्तविक स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी और यह भी सामने आ जाएगा कि विकास धरातल पर हो रहा है या केवल पोर्टल और कागजों तक ही सीमित है।

इतना ही नहीं, वर्क आईडी संख्या 3171008029/RC/YD/958486255823758025 पर मस्टररोल संख्या 3600 से 3609 तक 28 जुलाई 2026 तक एनएमएमएस उपस्थिति दर्ज होने का विवरण पोर्टल पर दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब धरातल पर कार्य ही नहीं चल रहा था तो ग्राम रोजगार सेवक द्वारा प्रतिदिन एनएमएमएस किस आधार पर किया जा रहा था। उनका यह भी आरोप है कि बिना वास्तविक कार्य कराए ही संबंधित फाइल मेजरमेंट के लिए तकनीकी सहायक तक पहुंच गई है। यदि ऐसा है तो इसके बाद भुगतान प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सरकारी धन के भुगतान में हुई संभावित अनियमितताओं और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्यस्थल पानी से भरा हुआ है तो मस्टररोल किसके आदेश पर जारी किया गया? जब मौके पर एक भी मजदूर कार्य करता दिखाई नहीं दे रहा तो प्रतिदिन एनएमएमएस पर उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है? जब नहरों में पूरी क्षमता से पानी का संचालन हो रहा है तो ऐसे समय में नाला खुदाई और मिट्टी कार्य का मापन किस पैरामीटर पर किया जा रहा है? तकनीकी सहायक ने कार्य का मापन वास्तव में स्थल पर जाकर किया या कार्यालय में बैठकर? क्या खंड विकास अधिकारी ने कभी मौके पर जाकर कार्य का सत्यापन किया? और सबसे महत्वपूर्ण, यदि जांच में यह सामने आता है कि खेतों में पानी भरे होने और धान की रोपाई के बावजूद बिना कार्य कराए ही मस्टररोल जारी कराया गया तथा लगातार एनएमएमएस उपस्थिति दर्ज की गई, तो क्या ऐसे ग्राम रोजगार सेवक और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी या फिर इस पूरे मामले की भी लीपापोती कर दी जाएगी?

स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कार्यस्थल का स्थलीय निरीक्षण करने, एनएमएमएस फोटो, जियो-टैग, मस्टररोल, ई-एमबी तथा भुगतान अभिलेखों का मिलान कराने और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ग्राम रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।




